दमोह जिले में मंदिर के अंदर ओबीसी वर्ग के एक युवक से पैर धुलवाकर गंदा पानी पीने के मजबूर करने के पांच आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार की तरफ से हाईकोर्ट को बुधवार को यह जानकारी दी गई।
हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह युगलपीठ ने ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव के विरुद्ध की गई कार्यवाही तथा एनएसए की कार्यवाही के तथ्यों के संबंध में कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक दमोह को 24 घंटों में हलफनामे के साथ जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश मंगलवार को जारी किए थे। मामले में अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि दमोह जिले के ग्राम सतरिया में मंदिर के अंदर ओबीसी वर्ग के युवक से पैर धुलवाकर उसे गंदा पानी पीने के मजबूर किए जाने की घटना को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि मध्य प्रदेश में बार-बार होने वाली जाति संबंधित हिंसा और भेदभाव पूर्ण कार्यवाही स्तब्ध करने वाली है। ब्राह्मण क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सभी अपनी स्वतंत्र पहचान का दावा कर रहे हैं। इस पर नियंत्रण नहीं किया जाता है तो डेढ़ सदी के भीतर खुद को हिंदू कहने वाले लोग आपस में लड़कर अस्तित्वहीन हो जाएंगे।
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घटना के मीडिया में प्रकाशित वीडियो व खबर के अनुसार दमोह जिले के ग्राम सतरिया थाना पटेरा ग्राम पंचायत ने शराबबंदी लागू होने के बावजूद गांव में रहने वाला अन्नू पांडे नामक युवक शराब बेच रहा था तथा शराब के नशे में था। इसके कारण पंचायत ने अन्नू पर जुर्माना लगाया था। इसके बाद गांव में रहने वाले ओबीसी वर्ग के एक युवक ने एआई की मदद से अन्नू की फोटो के गले में जूतों की माला पहनाते हुए उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया था। इस पर लोगों की आपत्ति के बाद ओबीसी युवक ने सोशल मीडिया से मीम हटा दी थी। इसके बाद पंचायत बुलाते हुए ओबीसी वर्ग के युवक को गांव के मंदिर में बुलाया गया। मंदिर के अंदर लोग की भीड़ ओबीसी वर्ग के युवक को घेरे हुए थी। ओबीसी वर्ग के युवक ने अन्नू पांडे के पैर धोए और गंदा पानी भी पिया था। पूरी घटना का वीडियो बनाया गया और विभिन्न चैनलों में दिखाया गया।
हाईकोर्ट ने एनएसए में कार्रवाई के दिए थे आदेश
युगलपीठ ने संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए 14 अक्टूबर को पारित अपने आदेश में कहा है कि न्यायालय आमतौर पर आरोपियों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई के आदेश नहीं देता है, यह करना कार्यपालिका का विवेकाधिकार है। लेकिन, पीड़ित जिस समुदाय से आता है, घटना के कारण उस वर्ग के लोगों में आक्रोश के कारण तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो हालात हिंसा की तरफ बढ़ सकते हैं। इसके बाद पुलिस की कार्यवाही अप्रभावी हो जाएगी और सार्वजनिक व्यवस्था भंग हो सकती है। जातिगत कटुता और भेदभाव चरम पर पहुंचे इसके पहले आरोपियों के खिलाफ दमोह पुलिस एनएसए की कार्यवाही करे। युगलपीठ ने एफआईआर में धारा 196 2 ,351 तथा 133 को भी जोड़ने के आदेश दिए हैं।
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याचिका पर बुधवार को आगे हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने अनूज उर्फ अन्नू पांडे की तरफ से याचिका में हस्तक्षेपकर्ता बनने तथा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश पर पुनर्विचार करने के आवेदन पेश किए। आवेदन में कहा गया था कि पीड़ित व्यक्ति ने पहले आवेदनकर्ता की फोटो में एआई की मदद से जूतों की माला पहनाकर उसे सोशल मीडिया में वायरल की थी। हाईकोर्ट ने आधे अधूरे तथ्यों के आधार पर मामले को संज्ञान में लिया है।
सरकार की तरफ से बताया गया कि गत दिवस सुनवाई के दौरान दमोह पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित थे। हाईकोर्ट ने निर्देश पर अतिरिक्त महाधिवक्ता को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई थी। पुलिस अधीक्षक के अनुसार अनुज उर्फ अन्नू सहित पांच व्यक्तियों के खिलाफ एनएसए की कार्यवाही की गई है।