प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई के लिए फिर गठित होगी विशेष बेंच
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एक्टिंग चीफ जस्टिस) विवेक रूसिया ने स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया है। अब इस प्रकरण की सुनवाई के लिए नई द्वैधपीठ (डिवीजन बेंच) का गठन किया जाएगा। संभावना है कि इस संबंध में अगले दो-तीन दिनों में प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया जाएगा।
यह मामला भोपाल निवासी स्वाती सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में राज्य सरकार की नई पदोन्नति (प्रमोशन) नीति को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने नई नीति के नाम पर कोई मौलिक बदलाव नहीं किया, बल्कि पुरानी प्रमोशन नीति में मामूली संशोधन कर उसे नया स्वरूप दे दिया है। उनका तर्क है कि नई नीति में आरक्षण संबंधी कई विसंगतियां बरकरार हैं।
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सोमवार को इस मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अंतरिम राहत पर बहस चल रही थी। इसी बीच आर.बी. राय प्रकरण का उल्लेख होने पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने बताया कि वह इस मामले से जुड़े एक पुराने प्रकरण में अधिवक्ता के रूप में पक्षकार की ओर से पेश हो चुके हैं। न्यायिक निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से उन्होंने स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग करने का निर्णय लिया।
खंडपीठ ने फिलहाल राज्य सरकार की प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने या किसी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले की अंतिम सुनवाई विशेष रूप से गठित नई डिवीजन बेंच करेगी, जिसका गठन शीघ्र किया जाएगा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने पक्ष रखा। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा और अधिवक्ता नमन नागरथ ने दलीलें प्रस्तुत कीं। अब सभी की नजर नई बेंच के गठन और आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।