पुलिस थाने में लॉकअप के अंदर 24 घंटे से अधिक अवैध हिरासत में रखे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग ने हाईकोर्ट की जस्टिस विशाल घगट की एकलपीठ को बताया कि याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के काफिले को रोकने का संदेश व्हाट्सएप पर भेजा था। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता और व्हाट्सएप संदेश के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए पुलिस विभाग को तीन सप्ताह का समय दिया है।
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जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता अजीत सिंह आनंद ने अपनी याचिका में बताया कि गोरखपुर पुलिस ने 20 जून 2022 की सुबह लगभग आठ बजे उन्हें जबरन घर से गिरफ्तार किया और गोरखपुर थाने ले गई। हालांकि, पुलिस ने थाने में लाने की कोई भी एंट्री रोजनामचे में दर्ज नहीं की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें अवैध रूप से थाने के लॉकअप में बंद रखा गया और अगले दिन 21 जून 2022 की सुबह 9:30 बजे छोड़ा गया। थाने से रिहाई की एंट्री रोजनामचे में दर्ज की गई थी, जिसमें उल्लेख था कि वह रातभर थाने में रहे।
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पुलिस विभाग ने हाईकोर्ट में बताया कि याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के काफिले को बाधित करने के संबंध में एक व्हाट्सएप संदेश भेजा था। लोकतांत्रिक देश में प्रदर्शन किए जा सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के प्रोटोकॉल को बाधित नहीं किया जा सकता। पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को केवल पूछताछ के लिए बुलाया गया था और वह स्वयं अपनी मर्जी से थाने में रुका। साथ ही, याचिकाकर्ता के खिलाफ 25 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड भी मौजूद है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपने निजी मोबाइल से इस प्रकार का कोई व्हाट्सएप संदेश भेजने से इनकार कर दिया। अनावेदकों (पुलिस पक्ष) ने याचिकाकर्ता और व्हाट्सएप संदेश के संबंध में प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।
एकलपीठ ने पुलिस विभाग के आग्रह को स्वीकार करते हुए तीन सप्ताह का समय प्रदान किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा।
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