मुंबई क्राइम ब्रांच का डीसीपी बनकर एक शातिर युवक ने जबलपुर निवासी 70 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 45 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने वृद्ध को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर उसके खाते से रकम आरटीजीएस के जरिए कोलकाता स्थित एक अन्य खाते में ट्रांसफर करवाई। राज्य साइबर सेल जबलपुर ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वीडियो कॉल से शुरू हुई ठगी
चेरीताल निवासी पीड़ित वृद्ध को 15 जुलाई को एक वीडियो कॉल आया। कॉल पर एक पुलिस अधिकारी की फोटो लगी थी। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का डीसीपी विजय खन्ना बताया और कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हो चुका है। आरोपी ने दावा किया कि वृद्ध के मोबाइल नंबर और बैंक खातों का इस्तेमाल इस अपराध में हुआ है।
ये भी पढ़ें:
बड़ी तुम्मी में सेल्फी लेते समय 50 फीट गहरी खाई में गिरा 18 साल का युवक, दर्दनाक मौत
कमरे में बंद कर रखा, दी धमकी
आरोपी ने पीड़ित से कहा कि वह तुरंत एक कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर ले और किसी से भी संपर्क न करे। वृद्ध ने भयभीत होकर ऐसा ही किया। आरोपी ने उसे केवल तय समय पर वीडियो कॉल अटेंड करने की अनुमति दी और बार-बार कहा कि यदि किसी को जानकारी दी तो तत्काल गिरफ्तारी हो जाएगी।
45 लाख की रकम करवाई ट्रांसफर
डर और भ्रम में आए वृद्ध ने 17 जुलाई को आरोपी के कहने पर आरटीजीएस के माध्यम से 45 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ये राशि पहले एक खाते में और फिर वहां से कोलकाता के एक अन्य खाते में भेजी गई।
ये भी पढ़ें:
पत्नी ने की मायके जाने की जिद तो भड़के पति ने किया हमला, सिर में आई गंभीर चोट
बेटे से बात करने पर खुली पोल
घटना के बाद वृद्ध ने फोन पर बेंगलुरु में रहने वाले अपने बेटे को जानकारी दी। बेटे ने समझा कि उनके पिता साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। इसके बाद वृद्ध ने राज्य साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। राज्य साइबर सेल की थाना प्रभारी नीलेश अहिरवार ने बताया कि अज्ञात आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान और बैंक खातों की ट्रैकिंग की जा रही है।