भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी आईएएस अधिकारी कविंद्र कियावत सहित अन्य के खिलाफ दर्ज प्रकरण में जांच के लिए समय प्रदान करने सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। जांच अवधि की तय समय-सीमा बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा यह दूसरी याचिका प्रस्तुत की गई है। लोकायुक्त द्वारा की गई जांच संबंधित रिपोर्ट के रिकॉर्ड में नहीं आने के कारण हाईकोर्ट जस्टिस शीलू नागू तथा वीरेंद्र सिंह ने याचिका पर अगली सुनवाई याचिका फरवरी के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की है।
गौरतलब है कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कविंद्र कियावत सहित 16 अभियुक्तों के खिलाफ लोकायुक्त विभाग ने नवंबर 2019 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। प्रकरण में कविंद्र कियावत सहित उज्जैन में पदस्थ रहे 4 कलेक्टर भी आरोपियों की सूची में शामिल हैं। उन पर आरोप है कि उज्जैन की हवाई पट्टी के रखरखाव पर सरकारी पैसा खर्च किया। हवाई पटटी का रखरखाव तथा उपयोग का ठेका यश एयरवेज को दिया गया था। आरोपियों ने संबंधित संबंधित कंपनी से लायसेंस फीस व पार्किंग शुल्क आदि भी नहीं लिया। लोकायुक्त ने शिकायत मिलने पर वर्ष 2015 में प्रकरण की जांच प्रारंभ की थी और चार साल बाद प्रकरण दर्ज किया था।
लोकायुक्त द्वारा दर्ज एफआईआर से नाम हटाए जाने की प्रार्थना करते हुए कविंद्र कियावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की युगलपीठ आदेश पर एकमत नहीं थी। जिसके कारण तीसरे जस्टिस को आदेश के लिए याचिका रिफर किया गया था। जस्टिस जी एस आलुवालिया ने सितंबर 2019 में याचिका को खारिज करते हुए लोकायुक्त को 9 माह में जांच करने के निर्देश दिए थे। निर्धारित अवधि में जांच पूर्ण नहीं होने के कारण सरकार ने समय बढ़ाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका का निराकरण करते हुए हाईकोर्ट ने जांच की समय सीमा में 6 माह की बढ़ोतरी की थी।
निर्धारित समय सीमा गुजर जाने के बाद सरकार की तरफ से समय बढाने की मांग करते हुए दूसरी याचिका पेश की गई थी। लोकायुक्त द्वारा अभी तक की गई जांच की रिपोर्ट भी हाईकोर्ट में पेश की गई थी। रिपोर्ट के रिकॉर्ड में नहीं आने के कारण युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। सरकार की तरफ से अधिवक्ता सत्यम अग्रवाल ने पैरवी की।