बिजली दर में बढ़ोतरी के प्रस्ताव के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका फिर खारिज कर दी गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने पूर्व में पारित आदेश को विधि अनुरूप करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
दरअसल, मध्य प्रदेश ट्रांसमिशन कंपनी ने घरेलू बिजली की दरों में 10% की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। इस पर मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में सुनवाई होनी है। आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। नई दरें अप्रैल 2022 से लागू होनी है। पूर्व में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे तथा रजत भार्गव ने बिजली दर में बढ़ोतरी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि नागरिक को संकट से उबारकर जीवन बिताने में सहायता प्रदान करना सरकार का संवैधानिक अधिकार है। केन्द्र सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन कानून 2005 के तहत कोविड-19 को नोटिफाइड आपदा घोषित की गई है। वर्तमान में ऑमिक्रॉन वायरस भी तेजी से फैल रहा है। कोरोना काल में लाखों परिवार आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं। याचिका में मांग की गई है कि सरकार अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हुए विद्युत अधिनियम की धारा 108 का प्रयोग करें।
इस संबंध में उन्होनें सरकार के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था, जिस पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई। युगलपीठ ने सरकार के पॉलिसी मेटर पर हस्तक्षेप से इंकार करते हुए 6 जनवरी को याचिका खारिज कर दी थी। जिसके खिलाफ उक्त रिव्यू याचिका दायर की गई थी। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद पूर्व में पारित आदेश को विधि अनुरूप करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।