विदेशों में प्रतिबंधित दवाओं के भारत में बेचे जाने पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि केन्द्र सरकार ने घातक दवाइयों को प्रतिबंधित कर दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया।
याचिकाकर्ता रजनीश कपूर की तरफ से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि भारत में अनेक ऐसी एलोपैथी दवाएं बेची जा रही हैं, जो विदेशों में अपने हानिकारक प्रभाव के कारण प्रतिबंधित हैं। भारत में इन्हें खुले आम बेचने की अनुमति है और इनमें सर्दी-जुकाम की दवाइयां शामिल हैं। ड्रग कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया इन पर प्रतिबंध लगाने में सख्त नहीं है।
केंद्र सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया है कि कोई भी दवाई १०० फीसदी सुरक्षित नहीं होती है और किसी भी दवाई पर प्रतिबंध केंद्र सरकार द्वारा विशेषज्ञों की सलाह से उस दवा से जुड़े जोखिम का आकलन कर लगाया जाता है। केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट की धारा 26 ए के अंतर्गत शक्ति का प्रयोग करते हुए अनेक दवाइयों पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की है। केंद्र सरकार ने ऐसी घातक दवाओं के संयोजन, निर्माण, विपणन पर जनहित में प्रतिबंध लगाया है। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से आशीष त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी, अपूर्व त्रिवेदी, आनंद शुक्ला ने पैरवी की।