कोरोना काल में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा 50 प्रतिशत छात्रों के साथ ऑफलाइन एग्जाम करवाए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर मंगलवार को सुनवाई की गई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस पी के कौरव को बताया गया कि कोरोना गाइड का परिपालन करते हुए ऑफलाइन परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना संक्रमित छात्रों को अवसर प्रदान करते हुए दो सप्ताह बाद उनके एग्जाम लिए जाएंगे। सरकार के जवाब से संतुष्ट होकर युगलपीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया। ।
जबलपुर बेदी नगर निवासी लॉ स्टूडेंट्स एसोशिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि पिछले साल के अंत में कोरोना महामारी का प्रकोप में कमी आई थी। इसके कारण रादुविवि ने एलएलबी सहित अन्य परीक्षाएं ऑफलाइन मोड से कराने का फैसला लिया था। जनवरी में कोरोना की तीसरी लहर आ गई है और संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। छात्र संगठनों के दबाव में रादुविवि प्रशासन ने आनन-फानन में 17 जनवरी को बैठक कर 20 जनवरी से आरम्भ होने वाली परीक्षाएं स्थगित कर दीं। परीक्षाए सिर्फ एक सप्ताह के लिए स्थगित की गई थीं। ऑफलाइन मोड से परीक्षा का आयोजन 27 जनवरी से किया जा रहा है। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए ऑफलाइन परीक्षाएं आयोजित करवाना खतरे से खाली नही हैं। छात्रों के जीवन को खतरे से बचाने के लिए ऑनलाइन मोड से परीक्षा ली जाए।
याचिका की सुनवाई के दौरान मंगलवार को सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में बताया गया कि कोरोना गाइड का परिपालन करते हुए ऑफलाइन परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना संक्रमित छात्रों को अवसर प्रदान करते हुए दो सप्ताह बाद उनके एग्जाम लिए जाएंगे। सरकार की जानकारी से संतुष्ट होकर युगलपीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया। सरकार की तरफ से उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली को सरकार से निर्देश लेकर मामले पर पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
सर्वोच्च न्यायालय में दायर करेंगे याचिका
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीपक तिवारी ने बताया कि याचिकाकर्ता के आग्रह पर उक्त आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी। कोरोना संक्रमण की दर में लगातार बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे समय में ऑफलाइन परीक्षा के आयोजन छात्रों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।