मप्र हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच से प्रिंसिपल सीट हटाने के नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाले मामले में हाईकोर्ट रजिस्ट्रार की ओर से अपना जवाब पेश कर दिया गया है। जिसमें कहा गया है कि केवल एफिडेवट, अपील, पिटीशन व एप्लिकेशन में प्रिंसिपल सीट शब्द विलोपित किया गया है।
हाईकोर्ट नियम 2008 के 1 (3) चेप्टर 12 के अनुसार पूर्व के नियम 1961 में उल्लेखित सभी फार्म्स यथावत रखे गए हैं, जो कि राष्ट्रपति के आदेश का उल्लंघन नहीं है। जवाब में कहा गया है कि देश के अन्य हाईकोर्ट्स की स्थायी बेंचों में भी उक्त दस्तावेजों में प्रिंसिपल सीट शब्द का उपयोग में नहीं है।
उल्लेखनीय है कि यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से दायर की गई है। जिसमें कहा गया है कि भारत के राष्ट्रपति ने 27 अक्टूबर 1956 को आदेश जारी कर जबलपुर में मप्र हाईकोर्ट को प्रिंसिपल सीट घोषित किया था। अत: हाईकोर्ट को राष्ट्रपति के आदेश को रद्द करने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद भी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने हाईकोर्ट नियम 2008 में किए गए संशोधनों का हवाला देकर 8 अक्टूबर 2021 को मप्र राजपत्र में नोटिफिकेशन जारी कर दिया कि जबलपुर के आगे प्रिंसिपल सीट शब्द विलोपित कर दिया गया है।
आवेदकों का कहना है कि उक्त नोटिफिकेशन अवैधानिक व अल्ट्रा वायरस है, जो कि भारत के संविधान के खिलाफ है। मामले में प्रार्थना की गई है कि उक्त नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए। जिस पर रजिस्ट्रार की ओर से उक्त जवाब दिया गया है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय पैरवी कर रहे हैं।