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जबलपुर: पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को चुनौती, हाईकोर्ट में याचिका दायर

Fri, 17 Dec 2021 08:14 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मप्र हाईकोर्ट में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के उन विभिन्न प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है, जिसमें पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निश्चित 25 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। 
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Jabalpur High Court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मप्र हाईकोर्ट में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के उन विभिन्न प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है, जिसमें पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निश्चित 25 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। याचिका में बगैर राजनीतिक पिछड़ापन तय किए ओबीसी आरक्षण के आधार पर राज्य चुनाव आयोग द्वारा पंचायतों के निर्वाचन को कटघरे में रखा गया है।
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यह याचिका पनागर निवासी अधिवक्ता पंडित आशीष कुमार तिवारी की ओर से दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि भारत के संविधान में विभिन्न पिछड़ापन के आधार पर आरक्षण प्रावधानित है। जिसमें सामाजिक व आर्थिक पिछड़ापन, आर्थिक पिछड़ापन व राजनीतिक पिछड़ापन है। संविधान के अनुच्छेद 15(4) व 16(4) में शिक्षण संस्थानों व शासकीय सेवा में सामाजिक व आर्थिक पिछड़ापन के आधार पर आरक्षण का प्रावधान है व इसके लिए पृथक कास्ट सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। इसी प्रकार संविधान के अनुच्छेद 15 (6) व 16(6) में आर्थिक पिछड़ापन के आधार पर भी आरक्षण प्रदान किया जाता है। जिसके लिए पृथक से आय के आधार पर आर्थिक पिछड़ापन का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
 
संविधान के अनुच्छेद 243-डी में पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए राजनीतिक पिछड़ापन के आधार पर आरक्षण का प्रावधान है, किंतु मध्यप्रदेश शासन ने आज तक स्वतंत्र आयोग गठित कर राजनीतिक पिछड़ापन के आकलन का कोई समसामयिक व व्यवहारिक डेटा तैयार नहीं किया है और न ही राजनीतिक पिछड़ापन से ग्रसित होने का कोई प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था बनाई। बिना इस प्रक्रिया को किए पंचायत कानून में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निश्चित 25 फीसदी आरक्षण का प्रावधान गैर आनुपातिक है।
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याचिकाकर्ता के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने भी अवधारित किया है कि अनुच्छेद 243 डी के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का आधार अनुच्छेद 15, 16 में प्रावधानित पैमाने से भिन्न राजनीतिक पिछड़ापन है, जिसकी जांच स्वतंत्र आयोग द्वारा होना चाहिए। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से आशीष त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी, अपूर्व त्रिवेदी, रितेश शर्मा, जयंत पटेल, अरविंद सिंह चौहान पैरवी करेंगे।
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