सिविल लायबिलिटी राशि में छूट दिए जाने को चुनौती दी गई है।
मप्र हाईकोर्ट ने लोक अदालत में विद्युत अधिनियम की धारा 126 एवं 135 में सिविल लायबिलिटी राशि में छूट दिए जाने को चुनौती देने वाले मामले को काफी गंभीरता से लिया। दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है उक्त अधिकार विद्युत कंपनी व सरकार को नहीं है, ऐसी छूट दिए जाने से चोरी को बढ़ावा मिलेगा। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।
याचिकाकर्ता जन सहयोग समिति बिलहरी के अध्यक्ष मंगलराम महावर की तरफ से दायर याचिका में लोक अदालत में विद्युत अधिनियम की धारा 126 एवं 135 में सिविल लायबिलिटी राशि में छूट दिए जाने को चुनौती दी गई है। दायर मामले में कहा गया है कि 12 मार्च को आयोजित लोक अदालत में धारा 135 एवं 126 के प्रकरण में मे राजीनामा के आधार पर छूट दी जाएगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने तर्क प्रस्तुत किया कि अधिनियम की धारा 126 के बिलिंग का प्रावधान धारा 126 में तथा 145 के लिए धारा 50 के तहत बनाए गए नियमों में किया गया है। उक्त नियमों के तहत निर्धारित की गई राशि छूट प्रदान करने का आधार अधिकार विद्युत कंपनी या सरकार को नहीं है। उक्त आदेश के द्वारा कंपनियों द्वारा चोरों को छूट दी जा रही है, जो ना केवल कंपनी को राजस्व हानि पहुंचा रही है, बल्कि चोरी को बढ़ावा दे रही है। जिसका नतीजा ईमानदार उपभोक्ता को अधिक बिल भुगतान करके सहना पड़ेगा। मामले में मप्र शासन के ऊर्जा विभाग के सचिव, मप्र इलेक्ट्रिसिटी कमीशन व मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को पक्षकार बनाया गया है। मामले में शुक्रवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई पश्चात न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।