याचिकाकर्ता पुजारी धर्मा नारायण मिश्रा की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि भोपाल के कबाड़ी बाजार में मरघट की जमीन है। मरघट में हिन्दुओं का श्मशान तथा मुस्लिमों को कब्रिस्तान है। जिसमें दशकों से शवों का अंतिम संस्कार होता आ रहा है। नगर निगम द्वारा मरघट की जमीन में प्लॉटिंग कर रहा है। बहुत बड़े क्षेत्र के लोग अंतिम संस्कार के लिए मरघट में आते हैं। प्लॉटिंग के कारण मरघट ही समाप्त हो जाएगा तो आसपास लगे इलाकों के लोगों को शवों के अंतिम संस्कार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
याचिका में कहा गया है कि मरघट की जमीन में प्लॉटिंग किया जाना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है। याचिका में मांग की गई थी कि प्लॉटिंग कार्य पर रोक लगाई जाए। याचिका में प्रमुख सचिव राजस्व, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, निगमायुक्त तथा एसडीओ को अनावेदक बनाया गया था। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस एम एस भटटी की युगलपीठ को बताया गया कि नगर निगम भोपाल की जमीन की बिक्री शुरू कर दी है। सरकार की तरफ से जवाब पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता लक्ष्मी चंद्र चौरसिया ने पैरवी की।