राज्य में एक वर्ष में औसतन लगभग 300 लोग केडेवरिक लिवर का इंतजार करते हैं। सैकड़ों रोगी अंग दाताओं की प्रतीक्षा करते हैं और अंत में अंग प्राप्त करने में असमर्थता के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। यह जानकारी लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन और कंसल्टेंट डॉ. निशांत शिव ने विश्व लिवर दिवस के अवसर पर पत्रकारों से चर्चा में दी। उन्होंने कहा कि हमारे देश में लगभग 80 से 90% लिवर प्रत्यारोपण लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट होता है जिस में सफलता का प्रतिशत 92 से 95% तक होता है। इस में दाता का लगभग 50 से 60% जिगर का हिस्सा निकालकर ग्रहण कर्ता में लगाया जाता है और इस में डोनर को कोई भी खतरा नहीं होता है और वह एक सामान्य जिंदगी जीता है। शैल्बी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर शुरू होने के मौके पर यह पत्रकार वार्ता आयोजित की गई थी।
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डॉ. इकबाल नबी कुरैशी ने कहा कि इस वर्ष (2023) वर्ल्ड लिवर डे की थीम है "सतर्क रहें, लिवर की नियमित जांच कराएं, फैटी लिवर किसी को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए हमें अपने लिवर की जांच नियमित रूप से करवानी चाहिए और ऐसी चीजों से बचना चाहिए जो आपके लिवर को नुकसान पहुचाती हों, जैसे अत्यधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी का वैक्सीन ना लगवाना, असुरक्षित यौन संबंध और ड्रग्स से बचें, आदि। नियमित व्यायाम करें और मोटापे से बचने के लिए एक्सरसाइज या दिनचर्या में सुधार करें ताकि लिवर में चर्बी जमा ना हो।
बदलती जीवन शैली की वजह से लिवर की बीमारियां बढ़ती जा रही हैं
डाक्टरों ने यह भी बताया कि लिवर का ढंग से काम करना हमारे शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। विगत कुछ वर्षों में बदलती जीवन शैली की वजह से लिवर की बीमारियां बढ़ती जा रही हैं, लिवर सिरोसिस उन में से एक है। लिवर सिरोसिस लिवर की लंबे समय चलने वाली बीमारियों में से एक है जो समय के साथ लिवर के लगातार खराब होने से होती है। लिवर सिरोसिस के लगभग 10 से 15 लाख नए मरीज प्रतिवर्ष भारत में आते हैं तथा इसमें से लगभग 30000 से 40000 मरीज को लिवर प्रत्यारोपण (लिवर ट्रांसप्लांट) की जरूरत पड़ती है। लिवर प्रत्यारोपण अंतिम चरण के लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर से पीड़ित रोगी के लिए एकमात्र विकल्प है। समय पर निदान और इलाज से मृत्यु को रोका जा सकता है।