कॉमनवेल्थ गोल्ड मैडलिस्ट सुप्रिया जाटव supriya jatav ने कहा यदि लड़कियां चिल्लाना ही शुरू कर दें तो आधे अपराध कम हो जाएंगे। women safety और self defence तो बाद की चीज है। Women Empowerment के लिए यही सबसे जरूरी है।
आज ही के दिन यानी 16 दिसंबर को दिल्ली में निर्भया कांड हुआ था जिसने पूरी दुनिया को दहला दिया था। एक लड़की के साथ छह लोगों ने रेप किया और बाद में उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद महिला अपराध मामलों में कई सख्त कानून बने लेकिन इस तरह की घटनाएं आज भी रुकी नहीं हैं। निर्भया दिवस पर अमर उलाजा ने कॉमनवेल्थ गोल्ड मैडलिस्ट (कराटे) सुप्रिया जातव supriya jatav ने बातचीत की जो बस्तियों में रहने वाली बालिकाओं को women safety व आत्मरक्षा के गुर सिखाती हैं और देशभर में महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यक्रम करती हैं। उनका मानना है कि कुछ घटनाओं को छोड़ दें तो अधिकतर घटनाएं सिर्फ इसलिए हो रही हैं क्योंकि हम बचपन से ही बालिकाओं को डरपोक बनाते हैं। हम उन्हें हर बात पर यह कहते हैं कि चुप रहो, किसी से चिल्लाकर कुछ मत कहो। इस तरह का व्यवहार उन्हें अपराध सहन करने के लिए मजबूर करता है।
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सेल्फ डिफेंस self defence से ज्यादा जरूरी है चिल्लाने की ताकत जुटाना
सुप्रिया देशभर में सेल्फ डिफेंस self defence की वर्कशाप लेती हैं। उनका मानना है कि सेल्फ डिफेंस तो बहुत बाद की चीज है। अधिकतर मामलों में तो परिचित, रिश्तेदार और दोस्त ही लड़कियों का शोषण करते हैं। जब वह एक या दो बार हरकत करते हैं और लड़कियां विरोध नहीं कर पाती तो उनका मनोबल बढ़ता है और वे बड़े अपराध कर जाते हैं। पहली ही बार में जोर से चिल्लाकर अपनी बात हर जगह बताइए। सिर्फ इतना करने से ही बहुत से अपराध रुक जाएंगे।
कॉमनवेल्थ तक का मेरा सफर भी आसान नहीं था
सुप्रिया ने बताया कि लड़कियों को बाहर जाने की आजादी आज भी उतनी नहीं है जितनी लड़कों को है। जब मैंने स्पोर्ट्स मैं जाने का फैसला किया तो घर में मुझे भी सभी को समझाना पड़ा। एक समय के बाद जब सबने मेरी मेहनत देखी तो मुझे प्रोत्साहित किया।