सार
रतलाम शहर की अपना एक इतिहास है। एक अलग तासिर है। ये शहर सेव, सोना, सट्टा और खानपान के लिए पहचाना जाता है। यहां बनने वाली रतलामी सेव का स्वाद खाड़ी के देशों तक जाना पहचाना है।
बसंत पंचमी को रतलाम की स्थापना हुई थी।
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मध्यप्रदेश में मालवा के पठार पर बसा साढ़े तीन लाख की आबादी का एक शहर है, जिसका नाम रतलाम है। बसंत पंचमी पर इस रियासत की स्थापना राजा रतन सिंह ने की थी। इस कारण गुरुवार को शहर का जन्म दिन गौरव दिवस के रूप में मनाया गया। आइये जन्मदिन के मौके पर जानते हैं इस शहर की खासियत।
रतलाम शहर की अपना एक इतिहास है। एक अलग तासीर है। ये शहर सेंव, सोना, सट्टा और खानपान के लिए पहचाना जाता है। यहां बनने वाली रतलामी नमकीन सेंव का स्वाद खाड़ी के देशों तक जाना पहचाना है। यहां का सोना भी शुद्ध माना जाता है। रेलवे के नक्शे पर भी रतलाम जंक्शन महत्वपूर्ण है। देश के मध्य में होने के कारण इस जंक्शन से देश के सभी राज्यों के रेल मार्ग की कनेक्टिविटी है।
यहां कचोरी खाने का अंदाज निराला
रतलाम में 40 वर्षों से रह रहे संजय मुसले बताते हैं कि यह शहर राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है, इसलिए राजस्थानी खान-पान की छाप यहां नजर आती है। यहां के सिखवाल ब्राह्मण समाज को भोजन में महारथ हासिल है। कई शहरों में रतलाम से खाना बनाने के लिए रसोई के महाराजों को बुलाया जाता है। यहां का मशहूर खान पान दाल बाफले चूरमा है। रतलाम में कचोरी को खाने का अंदाज भी अलग है। कचोरी में अलग से तेल डालकर खाया जाता है। इसे तर कचोरी कहते है।
डीएमआईसी कॉरिडोर रतलाम से गुजर रहा
वरिष्ठ पत्रकार नीरज कुमार बताते हैं कि रतलाम मध्य भारत के वाणिज्यिक शहरों में से एक रहा है। यहां पहले अफीम, तंबाकू, साड़ी का बड़ा कारोबार होता था। यहां औद्योगिक क्षेत्र भी है और कई बड़ी कंपनियां यहां उत्पादन करती हैं। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर रतलाम के नजदीक से होकर गुजर रहा है। इस वजह से अब इसका औद्योगिक विस्तार और तेजी से होगा।
रत्नपुर था नाम, जालौर के रतन सिंह को मिली थी जागीरी
रतलाम के इतिहास को लेकर कृष्ण कुमार दीक्षित बताते हैं कि रतलाम का नाम रत्नपुर था। मुगल बादशाह शाहजहां ने दरबार में एक हाथी को मार गिराने के कारण रतन सिंह को रतलाम शहर की जागीरी दी थी। रतन सिंह राजस्थान के जालौर से थे। होलकर, सिंधिया और पंवारों के बीच रतलाम अकेली राजपूताना रियासत थी।