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Indore Bawadi Accident: सबसे पहले बावड़ी में उतरे युवक की आंखोदेखी-दलदल में छटपटा रहे थे, कुछ झूला पकड़ कर बचे

Tue, 04 Apr 2023 06:08 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

बावड़ी में एक आंटीजी को मैने रस्सी से बांधा। उनका वजन काफी ज्यादा था। उपर खड़े लोग रस्सी पकड़ कर खींच रहे थे। मैने आंटीजी से कहा कि आप झूले की रस्सी सहारे के लिए पकड़ लो, लेकिन वे बेहोशी की हालत में थे। जैसे ही रस्सी गिरी वे फिर बावड़ी में गिरे।
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हितेश पटेल, जिन्होंने बचाई चार लोगों की जान - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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बेलेश्वर बावड़ी हादसे में ३६ लोगों की जान गई, लेकिन कुछ जाबांज युवक अपनी जान पर खेलकर बावड़ी में लोगों की जान बचाने के लिए उतरे थे, यदि वे ऐसा न करते तो और ज्यादा लोगों की मौत हो सकती थी। बावड़ी में सबसे पहले उतरे युवक हितेश पटेल ने उस दिन के हादसे की आंखों देखी अमर उजाला को बताई।

रामनवमी के दिन मैं अपनी पत्नी को मंदिर में छोड़ने आया था। सुबह के ११.५० बजे थे। मैं उसे छोड़कर बस चौराहे तक ही गया था और उसका कॉल आ गया और उनसे कहा जल्दी आ जाओ बावड़ी धंस गई। शुक्र है कि उसके जाने से पहले ही यह हादसा हो गया। बावड़ी के आसपास भीड़ जम गई। गली के छोर पर एक मकान पर पुताई हो रही थी। कुछ लोगों ने पुताई वालों से झूला मांगा और उसे बावड़ी में डाल दिया। उस झूले से हिम्मत कर मैं उतरा, ताकि जो लोग है, उन्हें बचा सकूं। पुताई वालों का झूला चार-पांच लोगों को सहारा बना हुआ था,जबकि कुछ लोग कुएं के पानी से निकल कर बावड़ी की सीढ़ियों पर बैठे थे। मैने दो बच्चियों को रस्सी के सहारे उपर पहुंचाया।

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झूले की रस्सी पकड़ लेते तो बच जाते आंटीजी
बावड़ी में एक आंटीजी को मैने रस्सी से बांधा। उनका वजन काफी ज्यादा था। उपर खड़े लोग रस्सी पकड़ कर खींच रहे थे। मैने आंटीजी से कहा कि आप झूले की रस्सी सहारे के लिए पकड़ लो, लेकिन वे बेहोशी की हालत में थे। जैसे ही रस्सी गिरी वे फिर बावड़ी में गिरे, उसका पैर मेरे कंधे पर लगा, मेरा भी संतुलन बिगड़ा,लेकिन मैं बच गया। बावड़ी में उतरकर फिर मैने उन्हें सहारा देने की कोशिश की, लेकिन वे बेसुध हो चुके थे।

मां के लिए दोस्त भी बावड़ी में उतरा
मेरे दोस्त मयंक पटेल की मां बावड़ी में थी। उन्हें बचाने के लिए मयंक भी बावड़ी में उतरा था। हम दोनों ने रस्सी से उनकी कमर बांधी। उनके शरीर में चोट भी लगी थी। रस्सी की मदद से उन्हें उपर तक पहुंचाया। दोस्त की कोशिश काम आई। उसकी मम्मी बच गई, लेकिन अभी अस्पताल में भर्ती है। एक अन्य युवक परेश पटेल भी बावड़ी में अपनी पत्नी को बचाने के लिए उतरा था। पहले उनसे मुझसे कहा कि तेरी भाभी को बचा ले, लेकिन वे पीठ के बल पानी में डूबी थी। मैं समझ गया कि उनकी जान जा चुकी है। बाद में परेश पत्नी को बावड़ी से निकाल कर ले गया, लेकिन डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  

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