इंदौर आई अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे Sonali Bendre ने शेयर किए जीवन के अनुभव, शहरवासियों के सवालों के भी जवाब दिए। कैंसर, परिवार और किताबों पर भी चर्चा की।
कैंसर एक एेसी बीमारी है जो आपको जीवन और मृत्यु के बहुत नजदीक लाकर खड़ा कर देती है। जब मुझे कैंसर हुआ तो मैं सच में बहुत परेशान हुई। मैं उन लोगों के जैसी नहीं हूं जो कहते हैं कि वे बहुत मजबूत हैं और वे कभी नहीं डरे। मुझे भी पता था कि क्या हो सकता है और मैं जीवन के किस दौर से गुजर रही हूं। इन सबके बीच मुझे बस एक बात याद थी और वह यह थी कि मेरा बेटा बहुत छोटा है और मुझे उसके लिए जीना है। बस इसी बात ने मुझे कैंसर से उबरने में सबसे ज्यादा मदद की। यह बातें अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे Sonali Bendre ने इंदौर में आयोजित लिट चौक कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने कई विषयों पर अपनी राय दी और शहरवासियों के प्रश्नों के भी जवाब दिए।
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सोशल मीडिया
पहले मैं सोशल मीडिया उपयोग नहीं करती थी। मेरी टीम ने कहा कि यह एक अच्छा प्लेटफार्म है आपको इसका उपयोग करना चाहिए। इसके बाद मैं इस पर आई। आज मैं लोगों को कहती हूं कि यह एक जबरदस्त टूल है। अच्छी बातों के प्रचार के लिए इसका उपयोग करिए।
किताबें
शादी और बच्चों के बाद मेरी किताबें पढ़ने की आदत छूट गई थी। जब मुझे कैंसर हुआ तो मैं फिर से किताबों की ओर लौटी। किताबों ने मुझे मानसिक शक्ति दी। अब हम अपना बुक क्लब शुरू कर चुके हैं। हर इंसान को इससे जोड़ते हैं। किताबें पढ़ते हैं उन पर चर्चा करते हैं।
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यंग जनरेशन
मैं अपने बच्चों को कहानियां सुनाती हूं और उन्हें भी किताबें पढ़ने को कहती हूं। आज मेरे बेटे यूट्यूबर्स को आदर्श मानते हैं। हमारे समय में तो यह होता ही नहीं था। अब समय बदल गया है और भविष्य में क्या होगा किसी को नहीं पता। मैं बच्चों से बस यही कहती हूं कि पढ़ाई कभी मत छोड़ना। मैं यदि आज भी एक्टिव हूं तो उसका सबसे बड़ा कारण ही यही है कि मैं लगातार पढ़ती हूं और नया सीखती हूं।
कैंसर
मैं सभी को कहती हूं कि सर्वाइवर नहीं थ्राइवर बनें। मतबल इसके हर पल को एंजॉय करें। यदि आप इसमें मन से मजबूत रहेंगे तो जल्दी ठीक हो जाएंगे। मैंने कई तरह की थैरेपी और काउंसलिंग ली और यह इसलिए लेना चाहिए क्योंकि यह हमें इससे उबरने में मदद करती है।