वेटलैंड दिवस के कार्यक्रम से पहले आयोजित कार्यशाला में प्रकृतिप्रेमियों ने रखे अपने विचार, बोले- इसे शहर के सबसे प्रमुख स्थल के रूप में विकसित करें। यह जिंदा हैं तो हम जिंदा रहेंगे।
कल इंदौर में होने वाले वेटलैंड दिवस के कार्यक्रम के लिए आज कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में मुख्य अतिथि पद्मश्री जनक पलटा मगिलिगन ने कहा कि इंदौर बहुत भाग्यशाली है कि रामसर वेटलैंड साइट में से हमारे पास सिरपुर (झील) तालाब और यशवंत सागर प्रकृतिक विरासत है। इससे लाखों लोगों को स्वास्थ्य लाभ हो रहा है और जलवायु भी अच्छी बनी रहती है। अब समय आ गया है कि इंदौर के लोगों को इन दोनों का संरक्षण करने के लिए आगे आना होगा। इसे बचाना होगा, क्योंकि इसे बचाकर ही हम बचेंगे। क्योंकि यह स्थान हमारे शरीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यत्मिक विकास में मदद करते हैं।
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शहर के लोगों को वहां पर सेवा करना होगी
हम इंदौरवालों को कमर कसकर अपने दोनों वेटलैंड पर कार सेवा करनी होगी। जैसा जोश, श्रध्दा, निष्ठा और सद्भावना अयोध्या के प्रति दुनिया ने दिखाई है वैसी ही प्राकृतिक स्थलों के लिए दिखाना होगी। अगर हम ये दो वैटलेंड नहीं बचाए तो हम बहुत बड़े आपात काल में चले जाएंगे। परसों के कार्यक्रम की तैयारी की बात हो रही है लेकिन मैं कहती हूं कि आने वाले बरसों के लिए हमें खड़े होना है। हमें अपने हाथ पैर हिलाने हैं, अपना तन मन इसमें लगाना है। अपने सिरपुर और यशवंत सागर वेटलैंड केवल मनोरंजन का साधन न बनें। हम लोग जाकर उसमें सहयोग करें और अपनी वालेंटरी सेवाएं दें। वहां माता-पिता अपने बच्चों को ले जाएं और बच्चे इतने जानकार हो जाएं कि अपने मित्रों को बताएं कि मैं वहां पर जाकर आया हूं। वहां बहुत अच्छे पक्षी हैं, बहुत अच्छी तितलियां हैं, बहुत अच्छा पानी है, बहुत सुंदर है और वहां चलकर बहुत अच्छा लगता है। तो लोगों को ऐसी प्रेरणा भी दी जानी चाहिए। अभी ज्यादातर लोगों को पता नहीं है कि सिरपुर तालाब/ लेक क्या है इसलिए वह उत्साह नहीं है।
जनता को जोड़ना जरूरी
लोग पूछते हैं कि इंदौर के आस पास घूमने, देखने, दिखाने के क्या स्थान हैं तो सिरपुर और यशवंत सागर का पता दो। वहां पर जाएं और कुछ काम करें। सोशल मीडिया पर उस काम का फोटो पोस्ट करें। कोई वहां से कचरा निकाल रहा है, किसी ने प्लास्टिक उठाया है। इस तरह के फोटो डालें। जब जनता इन क्षेत्रों से जुड़ेगी तभी इन क्षेत्रों का विकास होगा।