फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Indore Bawadi Accident:बावड़ी पर गरमाई राजनीति, विरोध के बाद लिया यू टर्न,मेयर अलग-थलग पड़े

Sat, 08 Apr 2023 02:12 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

लोगों की सहमति के बगैर मंदिर तोड़ने का फैसला मेयर और कलेक्टर को भारी पड़ा। पटेल नगर के रहवासी खुद मंदिर तोड़े जाने के विरोध में थे और हिन्दू संगठनों ने भी निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए। जब राजनीति  गर्माने लगी तो सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा।
विज्ञापन
पहले नगर निगम ने मंदिर तोड़ा, अब फिर बनाएगा। - फोटो : amar ujala digital
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इंदौर के बेलेश्वर मंदिर बावड़ी हादसे में बचाव कार्य में हुई चूक के कारण नगर निगम और प्रशासन वैसे ही निशाने पर रहा और अब हादसे के बाद के बाद मंदिर तोड़े जाने की कार्रवाई को लेकर भी गच्चा खा गया।

विज्ञापन

लोगों की सहमति के बगैर मंदिर तोड़ने का फैसला मेयर और कलेक्टर को भारी पड़ा। पटेल नगर के रहवासी खुद मंदिर तोड़े जाने के विरोध में थे और हिन्दू संगठनों ने भी निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मंदिर के मुद्दे पर राजनीति गर्माने लगी और सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। मुख्यमंत्री शिवरा सिंह चौहान की तोड़े गए स्थान पर दोबारा मंदिर बनाए जाने की घोषणा के बाद मेयर पुष्य मित्र भार्गव अलग-थलग पड़ गए और कुएं बावड़ियों को धर्मस्थलों से मुक्त करने की मुहिम भी ठंडी पड़ सकती है।

मुख्यमंत्री ने खुद दिए थे निर्देश
बावड़ी में गिरने से ३६ लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इंदौर आए थे तो उन्होंने खुद बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदेशभर में बावड़ियों को लेकर जांच की गई थी। कलेक्टर इलैया राजा टी ने धारा-१४४ के तहत आदेश जारी करते हुए कुएं-बावड़ियों का सर्वे करने और तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण हटाने के कार्रवाई शुरु की थी। जिस जगह हादसा हुआ। वहां से नगर निगम ने सबसे पहले कार्रवाई शुरू की। इस मामले में मेयर पुष्य मित्र भार्गव का कहना है कि हमने जो सूची तैयार की है। उसके हिसाब से कार्रवाई कर रहे है। पटेल नगर की बावड़ी में दरारें आ गई थी, इसलिए उसमे मलबा भर दिया गया।
विज्ञापन


४५ साल पहले बना था मंदिर
पटेल नगर आईडीए की स्कीम-३१ का हिस्सा है। आईडीए ने खेत अधिग्रहित किए थे, उसमें बावड़ी भी शामिल थी। बावड़ी के पास एक बरगद का पेड़ था। उसके नीचे ४५ साल पहले भगवान की मूर्तियां रखी गई थी। बाद में बावड़ी पर नगर निगम ने स्लैब डाली और फिर बावड़ी के उपर शेड का निर्माण कर मंदिर बना दिया गया।    

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें