देश में लाखों लोग अंगदान के लिए इंतजार कर रहे हैं और उनके चेहरे पर तभी मुस्कान आएगी जब उन्हें किसी के अंग मिल पाएंगे। जिन लोगों को अंगदान की जरूरत है वह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है और अंगदान करने वालों की बेहद कमी है। कई बार लोग भ्रांतियों और जानकारी के अभाव में भी अंगदान नहीं कर पाते। यह बातें समझते हुए इंदौर की बस्तियों के बच्चों ने लोगों को अंगदान के लिए जागरूक किया। बच्चों ने पहले खुद अंगदान का महत्व समझा और बाद में अपने हाथों से जरूर अंगों की पेंटिग्स बनाई और फिर इनके माध्यम से लोगों से अंगदान की अपील की।
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एक सप्ताह चला कार्यक्रम
बस्ती फाउंडेशन Basti Foundation की छाया कुशवाहा ने बताया कि अंगदान के लिए बचपन से ही जागरूकता लाने की जरूरत है। कल Organ Donation Day है, इसी बात को ध्यान में रखते हुए सिडबी की टीम ने इंदौर की बस्तियों में बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा। यह कार्यक्रम एक सप्ताह चला। पहले बच्चों को अंगों का महत्व समझाया फिर पेंटिंग्स की प्रैक्टिस करवाई। इसके बाद बस्तियों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। सिडबी के डीजीएम ललित कुमार मिन्ज, एजीएम जितेन्द्र कुमार मिंडा ने यह कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें दिनेश खंडेलवाल, पुष्पेंद्र तिवारी, सुमित साहू, आशुतोष द्विवेदी, संजय शुक्ला, शीतल और नीरज ने बच्चों को कई स्तर पर प्रशिक्षण दिया।
आंखें दान करने से नहीं बिगड़ता चेहरा
प्रशिक्षण कार्यक्रम में भ्रांतियों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि आंखें दान करने से कभी चेहरा नहीं बिगड़ता। जितना जल्दी हो सके दान के लिए संपर्क करना चाहिए। इसके साथ यह भी बताया गया कि जो अंगदान करना चाहते हैं वे किस तरह से खुद को रजिस्टर्ड कर सकते हैं। इसके लिए भारत सरकार की वेबसाइड notto पर सीधे जाकर खुद को रजिस्टर्ड कर सकते हैं।