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MP LS Election: इंदौर में नोटा के समर्थन में अभियान, मतदान के पूर्व चर्चा गर्म, क्या बनेगा रिकॉर्ड

सार

2013 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से नोटा का विकल्प 2014 के लोकसभा चुनाव में सम्मिलित हुआ था। इंदौर में 2014 लोकसभा चुनाव में नोटा में 5944 (वैध मतों का 0. 28 प्रतिशत) और 2019 में 5045 (वैध मतों का 0.21 प्रतिशत) मत डाले थे। 2022 के महापौर चुनाव में नोटा में 6048 मत मिले थे। 
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इंदौर में नोटा को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर लोकसभा चुनाव क्षेत्र एकाएक चर्चा का केंद्र बिंदु बन गया है। कांग्रेस के उम्मीदवार अक्षय कांति बम के भाजपा में शामिल होने और अपना नाम वापस लेने के बाद भाजपा में ही अंदरूनी विरोध होने लगा है। खरगोन दौरे पर आए प्रधानमंत्री ने इंदौर के नेताओं से पूछ ही लिया की क्या इंदौर में इस बार मतदान कम होगा? भाजपा का उम्मीदवार कितने मतों से विजयी होगा? भाजपा के उम्मीदवार के विजयी होने के आंकड़े बूथ महामंत्री ने 11 लाख तक बताए हैं।
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जाहिर है भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भी इंदौर में बम का पार्टी में प्रवेश पच नहीं पाया है। कांग्रेस के साथ लोकतंत्र बचाओ समिति ने भी नोटा के प्रयोग का आग्रह मतदाताओं से करना आरम्भ कर दिया है। इंदौर को स्वच्छता में सात बार नंबर वन होने के बाद नोटा में नंबर वन बनाए जाने की बात कही जा रही है। इंदौर में कांग्रेस के नोटा के पक्ष में मतदान की अपील के साथ थीम सांग भी बना दिया है। कांग्रेस के नेताओं ने यह कहना भी शुरू कर दिया है कि इंदौर से कांग्रेस का उम्मीदवार चोरी हो गया है।

2014 से मिलने लगा यह विकल्प
2013 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से नोटा का विकल्प 2014 के लोकसभा चुनाव में सम्मिलित हुआ था। इंदौर में 2014 लोकसभा चुनाव में नोटा में 5944 (वैध मतों का 0. 28 प्रतिशत) और 2019 में 5045 (वैध मतों का 0.21 प्रतिशत) मत डाले थे। 2022 के महापौर चुनाव में नोटा में 6048 मत मिले थे। विधानसभा चुनाव 2023 के मतदान में इंदौर संसदीय क्षेत्रानुसार नोटा को 13,552 वोट मिले थे, जो पिछले दो लोकसभा चुनावो में नोटा को प्राप्त मतों से अधिक थे।
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इंदौर लोकसभा में 2004 में 50.92 प्रतिशत, 2009 में 50.76 प्रतिशत, 2014 में 62.25 प्रतिशत और 2019 में 69.31 प्रतिशत मतदान हुआ था। छह माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव 2023 में इंदौर में औसत मतदान 73.72 प्रतिशत रहा। वहीं, नगर निगम चुनाव 2022 में मतदान 71.33 प्रतिशत रहा था। इस तरह लोकसभा 2019, नगर निगम 2022 और विधानसभा 2023 के अनुसार इस बार लोकसभा चुनाव में इंदौर में मतदान प्रतिशत 75 फीसदी रहने का अनुमान है।

भाजपा उम्मीदवार के कभी आठ को कभी ग्यारह लाख से अधिक मतों से जीत दिलाने की बात कही जा रही है। 2004 में सुमित्रा महाजन 1 लाख 93 हजार 936 मतों से विजयी रही थी और 2009 में 11 हजार 480 मतों से विजयी रही थी। 2014 में सुमित्रा महाजन ने 4 लाख 66 हजार 901 मतों से जीत कर रिकॉर्ड बनाया था।

2019 में लालवानी 5 लाख से ज्यादा से जीते थे
शंकर लालवानी 2019 के चुनाव में 5 लाख 47 हजार 754 मतों से विजय हुए थे ,क्या वे अपनी विजय का यह रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे। 2022 के निगम महापौर चुनाव में पुष्य मित्र भार्गव की 1 लाख 33 हजार 497 मतों से जीत हुई थी। इससे पूर्व मालिनी गौड़ महापौर पद के लिए 2 लाख 46 हजार मतों से विजयी रही थी।

हार-जीत के गणित और मतों के अंतर का क्या इंदौर का रिकॉर्ड बनेगा? यह इसलिए भी मुद्दे का विषय हो गया है कि कांग्रेस का उम्मीदवार मैदान में नहीं है। भाजपा ही मुख्य पार्टी मैदान में है। बम के भाजपा में आने की चर्चा इंदौर और प्रदेश में ही नहीं वरन देशभर में हो रही है। अब पार्टी के कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे मतदाताओं को प्रेरित कर मतदान केंद्रों तक भेजें और जीत का रिकॉर्ड बनाएं।
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