हालिया विधानसभा चुनाव में प्रदेश में कुल 252 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं। इनमें से भाजपा की 27, कांग्रेस की 30, सपा की 11, आम आदमी पार्टी 11, बसपा 21 और निर्दलीय 88 ने अपना भाग्य आजमाया था। लेकिन भाजपा की 21 एवं कांग्रेस की 6 महिलाएं ही विजयी रहीं। विजयी महिला प्रत्याशियों में सर्वाधिक वरिष्ठ भाजपा की मीणा मांडवे हैं, जो छठी बार चुनी गई हैं।
उमरिया की मानपुर सीट से जीतीं मीणा मांडवे का इंदौर से गहरा नाता रहा और वे इंदौर के कस्तूरबा रूरल इंस्टीट्यूट में अध्ययन के दौरान खेल गतिविधियों से जुड़ी रही थीं, उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इंदौर में ही प्राप्त की थी। सर्वाधिक 20 महिलाएं सतना जिले से मैदान में थीं और शाजापुर तथा आगर-मालवा से कोई महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं थी। महिलाओं में इस बार सर्वाधिक मतों से विजयी होने का रिकॉर्ड कृष्णा गौर का रहा और न्यूनतम मतों से विजयी होने का रिकॉर्ड भीकनगांव से कांग्रेस की झूमा सोलंकी का रहा, वे 603 मतों विजयी रहीं।
मालिनी गौड़ व उषा ठाकुर चौथी बार जीतीं
इंदौर से मालिनी गौड़ और उषा ठाकुर चौथी बार चुनी गई हैं। 2018 के चुनाव में डबरा से कांग्रेस की इमरती देवी सर्वाधिक 57446 मतों से विजयी रही थीं, मालिनी गौड़ और कृष्णा गौर दूसरे और तीसरे क्रम पर रही थीं। 2018 में न्यूनतम 1264 मतों से नेपानगर से कांग्रेस की सुमित्रादेवी कास्डेकर विजयी रही थीं।
1952 में जमुना देवी व प्रतिभा देवी जीती थीं
मध्य प्रदेश निर्माण के बाद 1957 के चुनाव में 36 महिलाएं चुनाव लड़ी थीं और उसमें से 15 विजयी रही थीं। इससे पूर्व 1952 में जमुनादेवी और प्रतिभा देवी मध्य भारत से विजयी रही थीं। 1952 से 2023 के बीच 1972 एक ऐसा चुनाव वर्ष रहा जब प्रदेश में कोई महिला चुनाव में विजयी नहीं हो पाई थी। प्रदेश में अभी तक सर्वाधिक 31 महिलाएं 1985 में चुनी गई थीं। महिला आरक्षण के बाद और आने वाले समय में महिलाओं की सत्त्ता में भागीरदारी बढ़ने वाली है।
विधानसभा चुनावों में महिला उमीदवार
2023 में सर्वाधिक मतों से विजयी
2018 में सर्वाधिक मतों से विजयी महिलाएं
2023 में तीन बार से अधिक निर्वाचित महिलाएं