गुरुवार देर रात आई कांग्रेस की दूसरी सूची के बाद शुक्रवार को मालवा निमाड़ में कई स्थानों पर उम्मीदवारों का विरोध शुरू हो गया। जिन दावेदारों के टिकट कटे, उनके समर्थकों ने घोषित उम्मीदवारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कुछ दावेदारों ने बगावत कर निर्दलीय खड़े होने की घोषणा तक कर दी, नाराज नेताओं को मनाने की कवायद अभी प्रदेश स्तर पर शुरू नहीं हुई है। मालवा निमाड़ में जावरा, रतलाम ग्रामीण, शुजालपुर, बुरहानपुर खातेगांव और महू सीट पर घोषित प्रत्याशियों को विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
समर्थकों ने पुतला जलाया
शुजालपुर में कांग्रेस प्रत्याशी राम वीर सिंह का पुतला जलाया गया। इस सीट से योगेंद्र बंटी भी टिकट चाह रहे थे। उनके समर्थकों ने सड़कों पर पुतले जलाए और नारे लगाए कि शराब ठेकेदार नहीं चलेगा। समर्थकों ने बड़े नेतागणों पर भी पैसा लेकर टिकट देने के आरोप लगाए।
बागी को पुरस्कार,नहीं करेंगे काम, सौपे इस्तीफे
बुरहानपुर में कांग्रेस ने सुरेंद्र सिंह शेरा को टिकट दिया। शेरा ने पिछला चुनाव कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय लड़ा था और चुनाव जीत गए थे। इस बार कांग्रेस ने उन्हें ही उम्मीदवार बना दिया, तो कांग्रेस नेता विरोध में उतर आए। इस सीट से कुछ अल्पसंख्यक नेता भी टिकट मांग रहे थे। नाराज कार्यकर्ता बोल रहे है कि कांग्रेस ने बागी को पुरस्कार दे दिया है। अब हम चुनाव में काम नहीं करेंगे। इस सीट से अल्पसंख्यक उम्मीदवार की मांग को लेकर आधा दर्जन पार्षदों ने इस्तीफे देे दिए।
बाहरी प्रत्याशी नहीं चलेगा
रतलाम में कांग्रेस ने लक्ष्मण सिंह डिंडोर को टिकट दिया है। वे झाबुआ में रहते है। इस सीट से थावर भूरिया टिकट मांग रहे है। वे पूर्व विधायक रह चुके है। डिंडोर का टिकट होने के दो दिन पहले ही उनके समर्थकों ने कांग्रेस के बड़े पदाधिकारियों को ज्ञापन दिया था। शुक्रवार को डिंडोर से नाराज कार्यकर्ता एकत्र हुए और कहा कि बाहरी उम्मीदवार नहीं चलेगा। उधर रतलाम की जावरा विधानसभा सीट पर हिम्मत श्रीमाली का विरोध शुरू हो गया है। इस सीट से करणी सेना के जीवन सिंह और कांग्रेस नेता वीरेद्र सिंह टिकट मांग रहे है थे। उनके समर्थकों ने विरोध किया।
निर्दलीय चुनाव लड़ सकते है दरबार
महू से कांग्रेस ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए रामकिशोर शुक्ला को टिकट दिया है। इससे पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार के समर्थक नाराज है। शनिवार को दरबार अपने समर्थकों के साथ महू में रैली निकालेंग और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकते है। दरबार तीन बार लगातार महू से चुनाव हार चुके है। दरबार का कहना है कि हमारा सवाल है कि आखिर किस फार्मूले के तहत शुक्ला को टिकट दिया गया। वे कांग्रेस में 24 दिन पहले आए। उनका सर्वे में भी नाम नहीं है। फिर टिकट कैसे तय हो गया।