चुनाव आयोग ने राजस्थान में विधानसभा चुनाव के मतदान की तारीख को बदला है। 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन राज्य में मतदान होना था। देवउठनी एकादशी को विवाह अधिक होते हैं। इस बात को मद्देनजर रखकर अब मतदान 25 नवंबर को होगा।
भारत एक त्योहार प्रधान देश है, पूरे वर्ष भर किसी न किसी तिथि का एक विशेष महत्व है। आजादी के बाद ज्यादातर चुनाव फरवरी माह में हुए, तो उस माह में बसंत पंचमी या शिवरात्रि किसी न किसी तारीख को रहती ही है, यदि मार्च माह में हों तो होली, रंगपंचमी या लोहड़ी पर्व रहते हैं, जाहिर भारत की सांस्कृतिक विरासत इन पर्वों से जुडी है। मध्य प्रदेश के चुनावों का भी त्योहारों से गहरा नाता रहा है।
देश में चुनावों में धर्मगुरुओं के मठों पर, मंदिरों में दर्शन को जाना और हवन पूजन करवाना हर उम्मीदवार चाहता है। बगुलामुखी नलखेड़ा हो या दतिया की पीतांबरा पीठ वहां नेताओं का जमावड़ा आरंभ हो गया है। नवरात्रि में गरबा हो या माता पूजन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उम्मीदवार जुड़ा रहेगा और प्रचार करता रहेगा। यह एक फायदा होता है पर्वों का। विजयादशमी भी चुनाव से पूर्व है, इस बीच घर-घर संपर्क करना एक तरह से विजयादशमी मिलन हो जाएगा।
मध्य प्रदेश में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के नागरिकों ने छठ पूजा का उल्लेख कर तारीखों में बदलाव की बात कही है। इसके बाद भी मध्य प्रदेश में यह कोई पहला मौका नहीं है, जब त्योहार के वक्त चुनाव हो रहे हैं।
1957 से 2018 तक संपन्न विधानसभा चुनावों में मतदान की तारीख देखें तो कोई न कोई त्योहार मतदान की तिथि के आसपास रहा है। फिर भी मतदान पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। मतदाताओं ने मतदान प्रक्रिया में उत्साहपूर्वक भाग लिया। आरंभ के कुछ वर्षों में मतदान प्रतिशत जरूर कम रहा। कारण यह रहा कि उस वक्त लोगो में मतदान प्रति जागरूकता का अभाव था। पर धीरे-धीरे यह प्रतिशत बढ़ता गया।
वर्ष 1962 में पांच मार्च को रंगपंचमी थी और 8 मार्च को मतदान। उस वर्ष भी प्रदेश की जनता ने मतदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और अपने मत का उपयोग किया था। इस वर्ष मतदान के पांच दिन पूर्व दीपावली है, फिर भाई दूज और छठ पूजा जैसे बड़े पर्व हैं पर अब जनता काफी समझदार हो गई है और वह जोर-शोर से मतदान में हिस्सा लेगी और नए रिकॉर्ड बनाएगी।
रोचक जानकारी
- वर्ष 1972 में मतदान के दिन शीतला सप्तमी थी पर मतदान में पूजन बाद महिलाओं ने हिस्सा लिया।
- 1957 में मतदान के दिन माघ पूर्णिमा थी।
- 1957 में देश के दूसरे और प्रदेश के जन्म के बाद पहले चुनाव थे उसमें 33.17 प्रतिशत मतदाताओं ने मत का उपयोग किया।
- वर्ष 2008 में अब तक का सर्वाधिक मतदान 74.97 प्रतिशत हुआ था।