जिंदगी को अपने अंदाज में जीना हो तो कई चौकाने वाले फैसले भी लेता होते है। पेश से साफ्टवेटर इंजीनियर पूणे की एक युवती ने ऐसा ही किया। चार दीवारी की परंपरागत स्कूली शिक्षा के बजाए सात साल के बेटे को रोड स्कूलिंग करा रही है। खुद मल्टीनेश्नल कंपनी की जॉब छोड़कर बेटे के साथ भारत भ्रमण पर निकली है। फिलहाल वह इंदौर आई और यहां की सफाई व्यवस्था से प्रभावित है।
तीन माह पहले अनिका सोनावने ने बेटे परांश के साथ दिल्ली से सफर शुरू किया था। दोनो मां-बेटे अब तक महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू, उड़ीसा, कोलकता, आसाम, मेघालय, नागालैंड, पंजाब, जम्मू कश्मीर, गुजरात, यूपी, मध्य प्रदेश सहित 23 स्टेट घूम चुके है और अभी तक 100 से ज्यादा शहरों को देखा। अनिका को मध्य प्रदेश का मौसम पसंद आया। वे कहती है इंदौर साफ तो है, यहां ठेले पर भी कुछ खाने का व्यंजन चखे तो उसमें टेस्ट रहता है। अनिका के पति भी साफ्टवेयर इंजीनियर है और यूके में जाॅब करते है। जून मेें अनिका और परांश भी हमेशा के लिए वहां जाएंगे, लेकिन उससे पहले वह बेटे को भारत घुमाना चाहती है।
भारतीय मुद्रा के ऐतिहासिक स्थल दिखाए बेटे को
अनिका बताती है कि भारतीय मुद्रा में जितनी तस्वीरें है। वह मुझे बेटे को दिखाना है। जैसे 100 के नोट पर गुजरात के पाटन की रानी की वाव है। वह बेटे को दिखा चुकी है। 500 के नोट पर लाल किला, 50 के नोट पर बनी हम्पी मंदिर, 20 के नोट पर बनी एलोरा की गुफा भी बेटे ने देख ली। 200 के नोट पर सांची का स्तूप है। उसे दिखाने बेटे को इंदौर से भोपाल ले जाना है।
ऐसे हो रही बेटे की पढ़ाई
अनिका बताती है कि मैने बेटे के लिए रोड स्कूलिंग कॉन्सेप्ट अपनाया है। सफर के दौरान उसे पढ़ाती हुं। जिस स्थान को हम देखने जाते है। उसके बारे में बेटे को कॉपी में लिखने का कहती है। वह केजी तक ही स्कूल गया है। अब मेरे साथ घूमकर देश की संस्कृति, लोगों के रहने के तौर-तरीके, भाषा सीख रहा है। अनिका कहती है कि कई बार लोग बेटे के स्कूल को लेकर सवाल पूछते है। कहते आपने तो बच्चे का स्कूल छुड़वा दिया? लेकिन मुझे चिंता नहीं, वह प्रेक्टिकल नॉलेज ले रहा है।
अब तक चार लाख रुपये खर्च
अब तक 83 दिनों में 23 स्टेट घुम चुकी अनिका के चार लाख रुपये खर्च हो चुके है। वे बताती है कि हम लोकल ट्रांसपोर्ट को ही ज्यादातर अपनाते है। खाने में हल्का भोजन पसंद करते है और फल खूब खाते है।