बृहन्महाराष्ट् मंडल के 71 वे अधिवेशन के चलते इंदौर में देश भर एकत्र हुए मराठीभाषी परिवारों ने रविवार को जुलूस निकाला। जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। रास्ते भर वे वीर सावरकर को मिले भारत रत्न, नहीं सहेंगे सावरकर का अपमान..के नारे लगाते रहे। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया।वीर सावरकर की 57 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर रविवार की सुबह इंदौर सहित देश भर से आए हजारों मराठी भाषियों ने जुलूस निकाल कर सावरकर को भारत रत्न देेने की मांग की। उनका कहना था कि सावरकर ने देश के लिए प्राण दिए। उन्हें देश के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से अलंकृत किया जाए।
सुबह पलासिया चौराहे की तिलक प्रतिमा पर समाज के लोग इकट्टा होना शुरू हुए। इनमें देशभर से आए 300 से ज्यादा लोग भी शामिल थेे। जुलूस में घोड़े पर शिवाजी,तिलक, वीर सावरकर, देवी अहिल्याबाई, माता जिजाऊ की वेषभूषा पहने बच्चे सवार थे, तो युवक लेझिम नृत्य करते हुए चल रहे थे। हाथों में सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की तख्तियां लिए लोग नारे भी लगा रहे थे सावरकर का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान ।
हाथ में भगवा ध्वज लिए महिलाएं और गले में भगवा दुपट्टा डालकर महिला व पुरुष जुलूस में शामिल हुए। जंजीरवाला रोड स्थित वीर सावरकर प्रतिमा को माल्यार्पण के बाद मंच पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सत्यनारायण जटिया, मिलिंद महाजन,प्रशांत बडवे , श्री राम महाशब्दे, सुनील धर्माधिकारी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। इसके बाद मेयर को ज्ञापन देकर मांग की गई कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाए। मेयर भार्गव ने कहा कि देश को सावरकर रत्न के नाम से पुरस्कार घोषित कर देश की सेवा करने वाले को हर साल वह पुरस्कार देना चाहिए। कीर्तनकार चारुदत्त आफले और एवज भांडारे ने सावरकर के जीवन कार्य के बारे में जानकारी दी ।