झाबुआ में कई धार्मिक आयोजन होते है।
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विश्व हिन्दू परिषद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अनुषांगिक संगठन है। 1960 के बाद देश में धर्मांतरण के मामले सामने आने लगे थे। 1963 में मध्य प्रदेश के वनांचल में बसे झाबुआ में कई ईसाई मिशनरियों ने काम शुरू किया था। वहां धर्मांतरण को लेकर विवाद हुआ। जिसकी चर्चा देशभर में हुई। तब नियोगी कमीशन बना था। उसकी रिपोर्ट में भी धर्मांतरण का जिक्र था। संघ के सरसंघ चालक रहे माधव सदाशिव गोवलकर को तब जरूरत महसूस हुई कि धर्मांतरण को रोकने के लिए एक अलग से संगठन बनना चाहिए।
इसके बाद 1964 में कृष्ण जन्मअष्टमी पर विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना की गई। परिषद की पहली बैठक प्रयागराज में हुई थी और चारों शंकराचार्यों को एक साथ बैठकर हिन्दू समाज को संगठित करने पर चर्चा हुई थी।
परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल कहते हैं कि झाबुआ के कारण भले ही विश्व हिन्दू परिषद की गठन हुआ है, लेकिन हमें इस बात का मलाल है कि झाबुआ को पूरी तरह हम धर्मांतरण गतिविधियों से मुक्त नहीं कर पाए हैं। झाबुआ में कितने चर्च सरकारी जमीन पर हैं, कितनी ईसाई मिशनरियां पंजीकृत हैं। इसकी जानकारी हमने प्रशासन से सूचना के अधिकार के तहत मांगी थी, लेकिन नहीं दी गई। झाबुआ में हिन्दू धर्म छोड़ चुके परिवार हिन्दू परिवार की लड़कियों से विवाह करते हैं।
संघ कर चुका है झाबुआ में हिन्दू संगम
राष्ट्रीय स्वयं सेवक ने वर्ष 2002 में झाबुआ में झाबुआ हिन्दू संगम कराया था। उसमें एक लाख से अधिक लोग जुटे थे। झाबुआ में घर-घर जाकर आदिवासी परिवारों को हिन्दू धर्म से जोड़ने का अभियान चला था। घरों में हिन्दू देवताओं के पोस्टर्स बांटे गए थे। उस संगम का असर यह रहा कि उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में झाबुआ जिले की आठों सीटें भाजपा ने जीती थीं।