इंदौर में 300 करोड़ की लागत से बने बीआरटीएस को हटाने का फैसला सरकार ने किया है। बीआरटीएस के चौराहों पर नगर निगम ब्रिज बनाएगा। इसके लिए फिजिबिलिटी सर्वे भी हो चुका है, लेकिन तोड़ने के फैसले के बावजूद बीआरटीएस पर लाखों रुपये खर्च भी किए जा रहे है। इसे लेकर लोग भी आश्चर्यचकित है।
बीआरटीएस की बस लेन में सोमवार को नगर निगम कुछ हिस्सों में डामरीकरण करा रहा है। पलासिया, एलआईजी चौराहे पर बस लेन में श्रमिकों ने दिनभर डामरीकरण का काम किया।
दो माह पहले इंदौर में हुई यूरेशियन समूह की बैठक के समय भी बीआरटीएस की बस लेन की रैलिंग पर कलर पेंट किया गया। लोगों का कहना है कि जब बीआरटीएस को तोड़ने का फैसला सरकार ले ही चुकी है तो फिर उसमें नए सिरे से काम क्यों कराए जा रहे है। इस बारे में जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर का कहना है कि बसों का संचालन मार्ग पर जारी रहेगा। जहां गड्ढे हो चुके है। वहां पेचवर्क किया जा रहा है।
देश का सबसे पहला प्रोजेक्ट इंदौर में हुआ था मंजूर
बीआरटीएस का सबसे पहला प्रोजेक्ट देश में इंदौर शहर में स्वीकृत हुआ था। केंद्र सरकार ने इसके लिए 198 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। राज्य शासन ने भी इसमें राशि मिलाई थी। इंदौर के अलावा भोपाल में भी बीआरटीएस बना था, लेकिन उसे तोड़ा जा रहा है। इंदौर का बीआरटीएस प्रोजेक्ट सफल साबित हुुुआ है। इसके बावजूद उसे तोड़ने का फैसला लिया गया है। बीआरटीएस की बस लेन में हर रोज 80 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते है।