मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को इंदौर में आयोजित सोशियो कल्चरल फेस्टिवल लिट चौक में शामिल हुए। इस बार मंच पर वे अलग अंदाज में नजर आए। अमर उजाला के डिजिटल हेड जयदीप कर्णिक सवालों के साथ उनसे रूबरू हुए। इन्होंने कला, संस्कृति, साहित्य, युवा राजनीति पर बेबाकी से अपनी बात रखी।
अब मध्य प्रदेश में राजनीति की नई पौध तैयार कम होती है। छात्रसंघ चुनाव नहीं होना इसकी वजह है। क्यों नहीं होते प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव?
-हम जब कॉलेज में पढ़ते थे, तब पंचायत, निगम चुनाव नियमित नहीं होते थे। तब सिर्फ कॉलेज चुनाव ही एक मौका होता था युवाओं के पास, लेकिन अब पंचायत, निकाय चुनाव में नए चेहरे नजर आने लगे हैं। सहमति रही तो अगले सत्र से छात्रसंघ चुनाव भी एमपी में करा देंगे।
आपका बचपन संघर्ष, गरीबी में बीता, राजनीति में कैसे ये मुकाम हासिल किया।
- मैं रेस्टोरेंट चलाता था, लेकिन अच्छे नंबरों से पास भी होता था। पिता जी को लगता था कि पढ़ लिख कर भी अच्छी नौकरी नहीं लगती। इसलिए वे व्यापार पर जोर देते थे। कुछ लोगों नेताओं का शिक्षा को लेकर मजाक उड़ाते है, लेकिन मैं एमबीए, एलएलबी, पीएचडी कर राजनीति में आया। यह सच्चाई है कि प्राथमिक शिक्षा लेने के बाद 100 में से 33 बच्चे ही मिडिल में आते हैं। कॉलेज तक तो 99 प्रतिशत नहीं जा पाते। हमारी सरकार ने नई शिक्षा नीति बनाई है, जो बदलाव लाएगी।
इंदौर के विकास को लेकर आपकी क्या सोच है?
- इंदौर हमारा रोल मॉडल है। मैं पूरे प्रदेश को इंदौर जैसा बनाना चाहता हूं और इंदौर को दिल्ली-मुंबई से बेहतर।
मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं हैं। इस पर काम क्यों नहीं हो रहा?
- उज्जैन का महाकाल लोक स्मार्ट सिटी के पैसे से बना। हम प्रदेश में 11 लोक बना रहे हैं। मैं धर्म और संस्कृति से जुड़े रहस्यों वाले स्थानों पर भी काम कर रहा हूं। प्रदेश को बोरेश्वर मंदिर में एक बूंद जल पिंडी से बाहर नहीं निकलता, चाहे जितना भी जल डाल दो। उज्जैन में काल की गणना होती है। पाकिस्तान चीन हमारे दुश्मन देश है लेकिन वे भी सहमत है कि समय की गणना उज्जैन से हों।
इंदौर के प्रभारी का पद है खाली
- मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर का प्रभार किसी को नहीं दिया। इसका मतलब यह नहीं कि मैं प्रभारी हूं। यहां का कमरा खाली है, लेकिन पूरे प्रदेश के साथ इंदौर का विकास मेरी जिम्मेदारी है।