भागीथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई से अब तक 15 मौतें की बात सामने आई है। लेकिन सरकार ने जो स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की है, उसमें दूषित पानी से चार मौतें होना बताया गया है। जबकि इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 लोगों की मौत हो जाने की जानकारी मिलने की बात कही है। दरअसल, हाईकोर्ट में दूषित पेयजल मामले में दो याचिकाएं लगी हैं। भागीरथपुरा में हुई मौतों में एक महिला का पोस्मार्टम किया गया, बाकी सभी को स्वास्थ्य विभाग प्रारंभिक तौर पर सामान्य मौतें बताता रहा है। बाद में चार मौतों की वजह डायरिया बताई गई है।
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प्रदेश सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट
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रिपोर्ट आने में भी जानबूझ कर देरी
भागीरथपुरा मामले में सरकारी रिपोर्ट भी खूब इंतजार करवा रही है। मौतों का सिलसिला 28 दिसंबर से शुरू हो चुका था, लेकिन पहली रिपोर्ट दो जनवरी को आई जिसमें पेयजल दूषित बताया गया। जिन 15 मौतों की बात की जा रही है उनमें इनमें 9 महिलाएं, छह पुरुष और एक नवजात शामिल है। मौतों की वजह का खुलासा रिपोर्ट में शामिल नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने डायरिया की वजह से चार मौतें रिकार्ड की है। इंदौर में जब मुख्यमंत्री आए थे तो उन्हें भी अफसरों ने चार मौतें ही बताई, जबकि बस्ती में लगातार लोगों की मौत हो रही है।
इंदौर जिले के कलेक्टर शिवम वर्मा ने शुक्रवार को कहा कि जल प्रदूषण की घटना में अब तक आधिकारिक तौर पर पांच मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि अस्पताल में भर्ती मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 210 हो गई है।