इंदौर की जिस नदी में कभी लोग तैरते थे, होलकर राज में उसमें हाथी नहाते थे, वह सीवरेज मिलने के कारण गंदे नाले में तब्दील हो गई है। लेकिन अब एक बार फिर कान्ह व सरस्वती नदी का पुराना स्वरूप लौटाने की कवायद हो रही है। दोनों नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने 511 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
इंदौर की कान्ह-सरस्वती नदी उज्जैन के समीप शिप्रा नदी में जाकर मिलती हैं और शिप्रा चंबल में समाती है। चंबल नदी यमुना नदी में और यमुना आगे जाकर गंगा नदी में मिलती है। इसलिए नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत इंदौर की कान्ह एवं सरस्वती नदी को स्वच्छ करने के लिए केंद्र सरकार से 511 करोड रुपये की राशि स्वीकृत हुई है।
नमामि गंगे मिशन से मिली राशि
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि देशभर में करीब 1,200 करोड रुपये की अलग-अलग परियोजनाएं मंजूर हुई हैं, इनमें से सबसे ज्यादा 511 करोड़ रुपये इंदौर को मिले हैं। नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत गंगा नदी को स्वच्छ करने के लिए गंगा में मिलने वाली नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की कोशिश सरकार कर रही है।
सिंहस्थ में भी मिलेगा फायदा
छह साल बाद उज्जैन में लगने वाले सिंहस्थ मेले में भी कान्ह और सरस्वती नदी को प्रदूषण से मुक्त करने का फायदा मिलेगा, क्योंकि शिप्रा नदी को कान्ह नदी ही सबसे ज्यादा प्रदूषित करती है। केंद्र सरकार से मिलने वाली इस राशि से ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे और नदी में मिलने वाले सीवरेज को सीधे ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाई जाएगी। अभी नगर निगम सीमा में कुछ हिस्सों में नाला टैपिंग इंदौर नगर निगम ने की है, लेकिन नगर निगम सीमा के बाहर की काॅलोनियां फिर नदी को प्रदूषित कर रही हैं।
ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर प्रदूषण मुक्त करने की योजना
इस प्रोजेक्ट में लसुड़िया, भानगढ़, सांवेर तक ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर नदी को प्रदूषण मुक्त करने की योजना बनाई जाएगी। कान्ह एवं सरस्वती नदियों में प्रदूषण कम करने के लिए इंदौर नगर निगम ने भी एक प्रस्ताव भेजा है एवं इंदौर शहर की अभ्यास मंडल जैसी सामाजिक संस्थाएं भी इस विषय में लगातार सक्रिय हैं और उन्होंने पत्राचार भी किया है।