स्वच्छता में देश भर में अपनी पहचान बना चुके इंदौर ने अब अपने ग्रामीण क्षेत्रों को भी स्वच्छता में सिरमौर बनाने की तैयारी कर ली है। जिला प्रशासन ने इंदौर जिले के गांवों को पूरी तरह से स्वच्छ और कचरा मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत चार तहसीलों में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
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जिला पंचायत ने संभाली कमान
जिला पंचायत ने इस महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने का जिम्मा उठाया है। इसके अंतर्गत महू तहसील के भाटखेड़ी और दतोदा, इंदौर तहसील के तिल्लौर खुर्द और सांवेर तहसील के भांग्या में नए एमआरएफ सेंटर खोले जाएंगे। इन सेंटरों का मुख्य उद्देश्य घनी आबादी वाले गांवों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन करना है। इन चार सेंटरों के माध्यम से लगभग 35 गांवों को कवर किया जाएगा, जिससे रोजाना निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान हो सकेगा।
कचरा प्रबंधन क्षमता में होगी वृद्धि
जिला पंचायत के सीईओ सिद्धार्थ जैन के अनुसार, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 40 टन कचरा निकलता है। नए और पुराने एमआरएफ सेंटरों को मिलाकर रोजाना 16 से 20 टन कचरे का निपटान संभव हो पाएगा। बाकी बचे 20 टन कचरे को छोटे गांवों से साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक आधार पर इकट्ठा कर इन सेंटरों तक पहुंचाया जाएगा। इन नए सेंटरों को फटका, श्रेडर, बेलिंग मशीन, तौल कांटा और कन्वेयर जैसी आधुनिक मशीनों से लैस किया जाएगा।
देपालपुर बनेगा 100 दिन में नंबर वन
हाल ही में, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने देपालपुर को 100 दिनों के भीतर स्वच्छता में नंबर वन बनाने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने घोषणा की है कि देपालपुर में कचरा फेंकने पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और सबसे स्वच्छ वार्ड को विधायक की ओर से 11 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। महापौर ने कहा कि "इंदौर ने देश को स्वच्छता का रास्ता दिखाया है, और अब हम इंदौर के गांवों को भी स्वच्छता में नंबर वन बनाएंगे।"
एमआरएफ सेंटरों की लागत और मौजूदा स्थिति
प्रस्तावित नए सेंटरों के निर्माण पर कुल 1.90 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। वर्तमान में, जिले में पहले से ही चार एमआरएफ सेंटर कार्यरत हैं, जो 28,000 से अधिक घरों से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन कर रहे हैं। ये सेंटर मांगलिया, बांक, काली बिल्लौद और उमरिया में स्थित हैं।