30 किलोमीटर लंबे बायपास में आधी-अधूरी सर्विस रोड बनी, लेकिन उसकी भी मरम्मत नहीं की जा रही है।
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इंदौर का सिक्सलेन बायपास निर्माण के समय से ही विवादों में रहा है। फोरलेन को सिक्सलेन करने के एवज में 25 साल के लिए टोल टैक्स का ठेका दिया गया, लेकिन सुविधा गायब है। आश्चर्य की बात है कि बायपास के दोनों टोल नाकों से हर दिन 25 लाख रुपये वाहन चालकों से वसूले जा रहे हैं, लेकिन सर्विस रोड के गड्ढे नहीं भरे जा रहे हैं। गलत अंडरपास और खराब सर्विस रोड की वजह से पांच जक्शनों पर रोज ट्रैफिक जाम हो रहा है।
30 किलोमीटर लंबे बायपास में आधी-अधूरी सर्विस रोड बनी, लेकिन उसकी भी मरम्मत नहीं की जा रही है। बिचौली मर्दाना, झलारिया, एमआर-10 जंक्शन, तेजाजी नगर चौराहे पर सर्विस रोड पर आधे से एक फीट गड्ढे हो चुके हैं। भारी वाहन कई बार सर्विस रोड पर फंस जाते हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सर्विस रोड की मरम्मत नहीं कर रहा।
बाधक निर्माण हटा दिए, प्रोजेक्ट मंजूर नहीं हुआ
नगर निगम ने बायपास को फोरलेन करने के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर राज्य सरकार से 300 करोड़ मांगे हैं। प्रोजेक्ट तो अभी मंजूर हुआ नहीं, लेकिन अफसरों ने बाधक निर्माण तोड़ने में जल्दबाजी दिखाई। 50 से ज्यादा निर्माण जमींदोज कर दिए। अब प्रभावित लोग अफसरों से पूछ रहे है कि प्रोजेक्ट मंजूर नहीं हुआ तो हमारे निर्माण क्यों तोड़े। रहवासी जितेंंद्र गर्ग के अनुसार बड़े शहरों में अंडरपास नहीं बनते, बल्कि फ्लायओवर बनाए जाते हैं, लेकिन कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए 10 साल पहले मनमाने फैसले लिए और अब जनता सजा भुगत रही है।
बायपास से जुड़े विवाद
- देवास से राऊ तक फोरलेन बायपास बना था। जनप्रतिनिधियों ने सिक्सलेन बायपास की मांग ही नहीं की थी, लेकिन 10 साल पहले यूपीए सरकार ने प्रोजेक्ट मंजूर कर दिया।
- ठेका डीएलएफ और गायत्री कंपनी को दिया गया था। तब देश में कई बड़े प्रोजेक्टों के ठेके इस कंपनी को मिले थे और प्रियंका गांधी के पति राबर्ड वाड्रा पर कंपनी को फायदा पहुंचाने के आरोप भी लगे थे। बाद में बायपास ठेके से डीएलएफ कंपनी हट गई थी।
- निर्माण शुरू करने से पहले ही टोल वसूलने का अनुबंध कंपनी से किया गया। तय समयसीमा में सड़क बनी नहीं, लेकिन टोल टैक्स लोगों से वसूला गया। इस मामले में कोर्ट में भी याचिका लगी। अब निर्माण कंपनी से भी टोल संचालन के अधिकार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने छीन लिए हैं।