खजराना थाने के सामने सात साल तक बेड़ियों में जकड़े रहे 30 वर्षीय जैद अली की जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी है। एक समय मानसिक रूप से अस्वस्थ जैद अब सामान्य जीवन जीने लगा है। छह महीने पहले उसे जंजीरों से आजाद कर बाणगंगा मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरू में हिंसक रहे जैद की हालत में इलाज और काउंसलिंग से बहुत सुधार हुआ है।
Raja Murder Case: शिलांग पुलिस करेगी आरोपियों से राजा के जेवर बरामद, खाई में फेंकने से पहले निकालेे थे
9 साल की उम्र में सिर पर चोट लगने के कारण उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई थी। इलाज के लिए रुपए नहीं होने से उसकी स्थिति खराब होती गई। जैद की मां मुमताज बी ने उसे सालों तक एक ठेले से बांधकर रखा था। दिन-रात, धूप-बरसात और सर्दी-गर्मी के बीच वह बेड़ियों में ही कैद रहा। यह सब थाने से मात्र 100 मीटर की दूरी पर हो रहा था, फिर भी न पुलिस ने ध्यान दिया, न समाज ने हस्तक्षेप किया। आखिरकार इस साल 24 जनवरी को ‘प्रवेश’ नामक एनजीओ की पहल पर जैद का रेस्क्यू हुआ।
रेस्क्यू के दौरान हुआ था खूब हंगामा
प्रवेश संस्था की रूपाली जैन ने बताया कि जैद को छुड़ाने गई टीम को काफी संघर्ष करना पड़ा था। मां मुमताज को पैनिक अटैक आया और उन्होंने विरोध करते हुए खूब हंगामा किया। बेड़ियों की चाबी नहीं मिली तो पुलिस और संस्था की टीम ने हथौड़ी-छैनी से जैद को मुक्त कराया। करीब दो घंटे की कार्रवाई के बाद जैद को बाणगंगा मानसिक अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में भी था हिंसक, फिर आया बदलाव
जब 24 जनवरी को जैद को मेंटल हॉस्पिटल लाया गया तो शुरुआती दिनों में जैद का व्यवहार अस्पताल में भी हिंसक रहा, लेकिन इलाज के दौरान वह धीरे-धीरे शांत होता गया। तीन महीने के उपचार के बाद 26 मार्च 2025 को उसे ‘प्रवेश’ संस्था में लाया गया, जहां उसकी नियमित काउंसलिंग और गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।
डांस बना बदलाव की शुरुआत
संस्था में एक दिन डांस कार्यक्रम के दौरान जैद ने अचानक डांस करना शुरू किया। यह पहला संकेत था कि वह अब भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देने लगा है। इसके बाद उसे धीरे-धीरे दिनचर्या में ढाला गया। ब्रश करना, नहाना, खाना खाना, साफ-सफाई, यहां तक कि अगरबत्ती और गाय के गोबर से गणेश जी बनाना भी सीखा।
जैसे बच्चा सीखता है, वैसे सिखाया गया
संस्था के अनुसार जैद को गिनती, वर्णमाला, सामाजिक व्यवहार, और जीवन के छोटे-छोटे कौशल सिखाए गए। सात साल तक बेड़ियों में रहने के कारण उसकी मानसिक और बौद्धिक वृद्धि थम गई थी, जिसे अब फिर से विकसित किया गया है।
मां का बदला नजरिया, अब देती हैं दुआएं
पहले बेहद हिंसक रही मां मुमताज बी भी अब बेटे को बदलता देख संतुष्ट हैं। उन्हें समझाया गया कि जैद की भलाई के लिए ही यह सब हो रहा है। काउंसलिंग के बाद उन्हें भरोसा हुआ कि उनका बेटा सुरक्षित है। अब वे खुद जैद को लेकर नियमित रूप से संस्था आती हैं।
ईद पर मुस्कराया जैद का चेहरा
इस साल ईद के मौके पर जैद मां और खाला के साथ संस्था आया और उत्साह से त्योहार मनाया। रिश्तेदारों ने भी उसे स्वीकार किया और खुश हैं कि जैद अब पहले जैसा नहीं रहा। बचपन में सिंगर बनने का सपना देखने वाला जैद अब फिर से पढ़ाई और काम करने की इच्छा जता रहा है।
अब जी रहा है सामान्य जीवन
21 अप्रैल को जैद को मां को सौंप दिया गया। वे अब इंदौर की स्कीम 71 में रहती हैं और बेटे की देखभाल करती हैं। जैद का इलाज अभी भी जारी है और वह संस्था तथा डॉक्टरों के संपर्क में बना हुआ है। अब न सिर्फ मां, बल्कि पूरा परिवार उसके बेहतर भविष्य के लिए डॉक्टरों और काउंसलर्स को दुआएं देता है।