डॉक्टर विनायक पांडे
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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पूर्णिमा प्रदोषकाल में होती है तभी होलिका दहन होना चाहिए
शासकीय संस्कृत महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉक्टर विनायक पांडे ने बताया कि होलिका दहन दो मार्च को ही होगा। क्योंकि धर्मशास्त्रों का अभिमत है। पूर्णिमा प्रदोषकाल में होती है तभी होलिका दहन होना चाहिए। अगले दिन पूर्णमा है पर प्रदोषकाल में नहीं है। इसलिए दो को होगा। हालांकि दो को भद्रा भी है और भद्रा पूरी रात और सुबह 5.30 बजे तक रहेगी। निर्णय सिंधु और धर्मसिंधु के अनुसार भद्रा में राखी और होली नहीं मनाते हैं। इस पर शास्त्रों में बताया गया है कि भद्रा के मुख को छोड़कर होलिका दहन कर सकते हैं। प्रदोषकाल में भद्रा का मुख छोड़कर दो मार्च को शाम 6.28 से रात 8.52 तक होली जलाई जा सकती है।
चंद्रोदय के 17 मिनट बाद चंद्रग्रहण खत्म हो जाएगा
अगले दिन तीन मार्च को पूरे भारत में है चंद्रग्रहण है। ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। वहीं चंद्रोदय शाम 6.30 बजे होगा और फिर शाम 6.47 पर ग्रहण खत्म हो जाएगा। इस दिन सूतक भी रहेंगे। सुबह 6.30 से शाम को 6.47 तक सूतक रहेगा। इस समय में धुलेंडी मनाई जा सकती है और रंग खेल सकते हैं।
क्यों हो रहा संशय
डॉक्टर विनायक पांडे ने बताया कि पर्वकाल का महत्व है और प्रदोषकाल की तिथि व्याप्त होनी चाहिए। दो दिन पूर्णमा है लेकिन जिस दिन प्रदोषकाल होता है तभी होलिका दहन होता है। यदि ग्रहण नहीं होता तो तीन मार्च को ही होलिका दहन होता और चार मार्च को धुलेंडी होती।