इंदौर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हत्या और डकैती के मामले में आरोपी सुनीत उर्फ सुमित सिंह को जमानत दे दी है। इसके साथ ही, कोर्ट ने पुलिस जांच की तीखी आलोचना की और गंभीर अपराधों की जांच के लिए हर जिले में डीजीपी को एसआईटी बनाने के निर्देश दिए हैं।
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जांच में देरी और लापरवाही के कारण जमानत दी गई
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने 2020 के डकैती और हत्या के मामले में आरोपी सुमित सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। मामले में आवेदक ने नई लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और सीआरपीसी की धारा 439 के तहत छठी जमानत याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने कार्यवाही में देरी और ठोस सबूतों की कमी के कारण मंजूर कर लिया। कोर्ट ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच में कई खामियां हैं और आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस जांच में देरी और लापरवाही के कारण आरोपी को जमानत देने का फैसला किया गया है।
पुलिस जांच में कई खामियां
इसके अलावा, कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को प्रत्येक जिले में एक गंभीर अपराध जांच पर्यवेक्षण दल (एसआईटी) स्थापित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि एसआईटी का नेतृत्व एक वरिष्ठ स्तर का पुलिस अधिकारी करेगा, जो किसी अनुभवी आईपीएस अधिकारी के पद से नीचे का न हो।
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कोर्ट ने यह भी निर्धारित किया है कि जांच अधिकारियों को नियमित रूप से पर्यवेक्षण टीम को रिपोर्ट करना चाहिए, जिसे आगे की जांच विफलताओं के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा। इस फैसले से पुलिस जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। इस मामले में आरोपी सुमित सिंह को जमानत मिलने से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस जांच में कई खामियां थीं। कोर्ट का यह फैसला पुलिस जांच में सुधार और गंभीर अपराधों की जांच में पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।