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Devi Ahilya Birth Anniversary: ससुर मल्हारराव के भरोसे ने सती होने से रोका... और बन गईं नारी शक्ति मिसाल

Wed, 21 May 2025 08:00 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

होलकर राजवंश की महान शासिका देवी अहिल्या बाई होलकर का जीवन संघर्ष, त्याग और सुशासन की मिसाल है। उनका जन्म 31 मई 1725 को हुआ था और इस वर्ष उनकी 300वीं जयंती मनाई जा रही है।
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अहिल्याबाई होल्कर पुण्यतिथि। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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होलकर राजवंश के संस्थापक, प्रथम राजा और देवी अहिल्या बाई के ससुर मल्हारराव होलकर इंदौर में निवास करते थे। उनकी तीन पत्नियां थीं। गौतमा बाई, बना बाई और द्वारका बाई, गौतमा बाई (निधन अक्तूबर 1761) से एक पुत्र हुआ था, जिसका नाम खंडेराव था। 1725 में जन्मी अहिल्या बाई का विवाह 1735 में मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव से हुआ था। 1745 में अहिल्या बाई को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। उनके पुत्र का नाम मालेराव था। 1748 में अहिल्या बाई के यहां बेटी हुई, जिसका नाम मुक्ता बाई था। अहिल्या बाई ने अपने जीवन में कई संघर्षों का सामना किया और धैर्य पूर्वक प्रत्येक समस्या का सामना किया। युद्ध, आंतरिक विवाद और लगातार परिजनों को खोया, फिर संयम, न्याय और धर्म का परचम फहराती रहीं। यह भी उस दौर में जब महिलाओं को इतनी आजादी नहीं थी। तब ससुर मल्हारराव होलकर ने उन्हें नारी शक्ति के रूप में प्रस्तुत कर एक आदर्श पेश किया।

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बेटी मुक्ता बाई सती हो गई थीं
बेटी मुक्ता बाई का विवाह यशवंत राव फणसे से हुआ था। मुक्ता बाई का एक बेटा था, जिसका नाम नत्थू था। लंबी बीमारी के बाद सितंबर 1787 में नत्थू का निधन हो गया। मुक्ता बाई के पति यशवंत राव फणसे पुत्र के निधन से काफी दुखी रहने लगे। इस दुःख के कारण दिसंबर 1791 में यशवंत राव फणसे का निधन हो गया था। बेटी मुक्ता बाई ने पति के निधन के बाद सती होने का फैसला किया, अहिल्या बाई ने बेटी को बहुत समझाया पर वह नहीं मानी। वह सती हो गई थीं।

कुंभेर के युद्ध में पति खंडेराव का देहांत हुआ
मार्च 1754 में कुंभेर के युद्ध में अहिल्या बाई के पति खंडेराव का निधन हो गया था। अहिल्या बाई के ससुर मल्हारराव काफी दूरदृष्टिवान थे। उन्होंने अहिल्या बाई को बहू नहीं, बल्कि बेटी ही समझा और राजकाज के हर कार्य में उन्हें साथ रखा।
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मल्हारराव ने अहिल्या को सती होने से रोका
अहिल्या बाई युद्ध कला में भी निपुण थीं। पति खंडेराव के निधन के बाद अहिल्या बाई ने सती होने का फैसला लिया, पर ससुर खंडेराव ने उन्हें काफी समझाया। ससुर मल्हारराव होलकर ने अहिल्या बाई से कहा-''अब तू ही मेरा बेटा है, तू चली जाएगी तो मुझे कौन संभालेगा? मल्हारराव ने आगे कहा -बेटी जिस पुत्र को मैंने इतने लाड़-प्यार से बड़ा किया, वह आज मझधार में छोड़ कर चला गया। क्या तू भी मुझे अनाथ कर चली जाएगी?

तू रहेगी तो समझूंगा मेरा खंडू जिंदा है...
मल्हारराव ने अहिल्या से कहा था- देख बेटा, यह सारा राजपाट तेरा ही है यह सब तुझे ही संभालना है, अभी तक तुझे अपना लड़का समझ कर सब कुछ तुझे ही सौंप रखा था, तू रहेगी तो मैं समझूंगा कि मेरा खंडू अभी जिंदा है, तुझे देखकर मैं सारा दुःख भूल जाऊंगा। बेटी, सती होने का निर्णय त्याग दे। तू तो महासती है। इस घटनाक्रम के बाद देवी अहिल्या ने राज्य और परिवार के हित में सती नहीं होने का निर्णय लिया था। मल्हारराव होलकर बहू अहिल्या बाई की योग्यता, हिम्मत को जानते थे। अहिल्या बाई ने जिस तरीके से होलकर राजवंश का अपना कार्यकाल संचालित किया और अपने कार्यों से आज तक अपने नाम को अमर कर लिया।

1776 में मल्हारराव का निधन हो गया
मई 1766 में अहिल्या बाई के ससुर होलकर राज्य के संस्थापक मल्हारराव होलकर का निधन हो गया, बना बाई और द्वारका बाई (उनकी पत्नियां) सती हो गई थीं (संदर्भ होलकर शाहीचा इतिहास खंड प्रथम-पेज-160,चंद्रचूड़ दफ्तर)।

बेटे मालेराव ने सिर्फ एक वर्ष संभाला राजकाज
ससुर के निधन के बाद अहिल्या बाई के बेटे मालेराव ने 23 जुलाई 1766 को राज्य का कार्यभार संभाला। मालेराव अधिक समय तक राजपाठ संभाल नहीं पाए और 1767 में उनका निधन हो गया। अहिल्या बाई मालेराव के स्वभाव और व्यवहार से खुश नहीं थी।

28 साल राज किया देवी अहिल्या ने
बेटे के आकस्मिक निधन के बाद देवी अहिल्या बाई ने होलकर रियासत की सत्ता 1767 में संभाली थी। वे करीब 28 वर्ष 5 माह 17 दिन होलकर रियासत की महारानी रहीं। उनका जन्म 31 मई 1725 को हुआ था और 13 अगस्त 1795 को 70 वर्ष की उम्र में अहिल्या बाई का निधन हो गया। इस वर्ष 31 मई 2025 को उनके जन्म को 300 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस उपलक्ष्य में मध्य प्रदेश सरकार उनका त्रिशताब्दी जन्म महोत्सव मना रही है।

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