इंदौर के मल्हारगंज क्षेत्र में मंगलवार को छोटा गणपति मंदिर के सामने स्थानीय रहवासियों ने मानव श्रृंखला बनाकर मेट्रो स्टेशन निर्माण के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग और पुरुष बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर प्रशासन को संदेश दिया कि बड़ा गणपति मंदिर के पास पहले से ही मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित है, तो कुछ ही दूरी पर छोटा गणपति के पास एक और स्टेशन बनाने की आवश्यकता नहीं है। लोगों की मांग है कि पहले से तय टेंडर और योजना के अनुसार ही मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जाए।
पहले से चल रहा है विरोध, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
क्षेत्रीय व्यापारी और रहवासी शेखर गिरी ने बताया कि जब से छोटा गणपति मंदिर के पास मेट्रो स्टेशन का प्लान सामने आया है, तब से रहवासी लगातार विरोध कर रहे हैं। इससे पहले भी कई बार प्रदर्शन और आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मंगलवार को भी मानव श्रृंखला के माध्यम से विरोध दर्ज कराया गया। शेखर गिरी ने स्पष्ट किया कि यह विरोध आगे भी जारी रहेगा, क्योंकि प्रस्तावित स्टेशन से कई घर और दुकानें प्रभावित होंगी और लोगों की निजी संपत्तियों पर संकट खड़ा हो जाएगा।
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स्लोगन वाली तख्तियों के साथ हुआ शांतिपूर्ण विरोध
मानव श्रृंखला में शामिल लोगों ने हाथों में विभिन्न स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। इन तख्तियों पर लिखा था "उजाड़कर एमजी रोड का व्यापार, मेट्रो करेगी खुद का व्यापार", "मेट्रो अधिकारियों को समझना होगा, एमजी रोड मेट्रो का विकल्प खोजना होगा", "निजी संपत्तियों की बलि चढ़ेगी, सब स्टेशनों की तल मंजिल बनेगी", और "छुक-छुक करती आएगी मेट्रो, निजी संपत्तियां उड़ाएगी मेट्रो"। इस दौरान 'मेट्रो स्टेशन नहीं चाहिए', 'निजी संपत्ति की तोड़फोड़ बंद करो', 'मेट्रो स्टेशन से छोटा गणपति मंदिर को बचाओ' जैसे नारे भी लगाए गए।
निजी संपत्तियों पर संकट, रहवासी चिंतित
प्रदर्शन कर रहे रहवासियों का कहना है कि मेट्रो स्टेशन निर्माण की वर्तमान योजना से न केवल मंदिर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा पर असर पड़ेगा, बल्कि आसपास के कई घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी इसकी जद में आ जाएंगे। इससे लोग न केवल आर्थिक रूप से प्रभावित होंगे, बल्कि उन्हें अपने बसे-बसाए घरों और दुकानों से भी हाथ धोना पड़ेगा। रहवासियों की यही मांग है कि मेट्रो का विस्तार तो हो, लेकिन आम जनता और निजी संपत्तियों की कीमत पर नहीं।