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Indore News: धार भोजशाला के सर्वे पर आदेश सुरक्षित,1902 मेें हुए सर्वे का हवाला भी दिया

Mon, 19 Feb 2024 03:14 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

याचिका हिंदू फार जस्टिस ट्रस्ट की तरफ से लगाई गई है।ट्रस्ट की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने पक्ष रखते हुए कहा कि 1902 में हुए सर्वे में भोजशाला में हिंदू चिन्ह, संस्कृत के शब्द आदि पाए गए है।
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धार भोजशाला। - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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धार भोजशाला विवाद फिर चर्चा में है। हाईकोर्ट ने भोजशाला के सर्वे पर आदेश सुरक्षित रखा है।  भोजशााला को लेकर सात लगी जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष ने मंदिर परिसर का दोबारा सर्वे करने की मांग याचिका में की है। सुनवाई मेें 1902 में भोजशाला में हुए सर्वे को लेकर भी बहस हुई। कोर्ट ने इस मामले में आदेश सुरक्षित रखा है।

आर्कियोलाॅजिक्ल सर्वे आफ इंडिया ने भी 1902 में हुए सर्वे की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी। सर्वे में भोजशाला की भारतीय वस्तुकला, विष्णु प्रतिमा के प्रमाण के तस्वीरें भी है। याचिका में कहा गया है कि भोजशाला में हिंदू समाज को नियमित पूजा का अधिकार है। वहां मुस्लिम समाज नमाज पढ़ता है। याचिका में नमाज पढ़ने पर रोक लगाने की मांग भी गई।

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याचिका हिंदू फार जस्टिस ट्रस्ट की तरफ से लगाई गई है। इसके अलावा छह अन्य याचिकाएं भी इस मामले में पूर्व में लगी है। ट्रस्ट की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने पक्ष रखते हुए कहा कि 1902 में हुए सर्वे में भोजशाला में हिंदू चिन्ह, संस्कृत के शब्द आदि पाए गए है। इसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच होना चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो। दूसरे पक्ष की तरफ से कहा गया कि जबलपुर कोर्ट में याचिका चल रही है। हाईकोर्ट ने उस याचिका की जानकारी भी कोर्ट में पेश करने के लिए कहा है।

क्या है 1902 की रिपोर्ट में

हाईकोर्ट में आर्कियोलाॅजिक्ल सर्वे आफ इंडिया की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। वर्ष 1902 में लाॅर्ड कर्जन धार, मांडू के दौरे पर आए थे। उन्होंने भोजशाला के रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये खर्च करने की मंजूरी दी थी। तब सर्वे भी किया गया था। 1951 को धार भोजशाला को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है। तब हुए नोटिफिकेशन में भोजशाला और कमाल मौला की मस्जिद का उल्लेख है।

1995 में हुए विवाद के बाद प्रशासन ने मुस्लिम समाज को हर शुक्रवार नमाज पढ़ने और हिंदू समाज को बसंत पंचमी पर पूजन करने की अनुमति दी। बसंत पंचमी जब भी शुक्रवार को आई। धार में तनाव जैसे हालात रहे। बाद में हर मंगलवार को पूजन और शुक्रवार को नमाज पढ़ने का आदेश भी जारी हुआ।

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