फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Indore News: विकास या विनाश? गायब होती बैकलाइन ने घरों में घोल दिया जहर

सार

Indore News: इंदौर में पीने के पानी में सीवरेज मिलने का मुख्य कारण घरों की बैकलाइन का खत्म होना पाया गया है। शहरी नियोजन में बदलाव के कारण अब ड्रेनेज और पेयजल की लाइनें पास-पास डाली जा रही हैं जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
विज्ञापन
गंदे पानी की घटना में 5 महीने के अव्यान ने भी दम तोड़ा। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भागीरथपुरा में पिछले कुछ साल के दौरान घरों के पीछे बनी बैकलाइन धीरे धीरे खत्म हो गई। कहीं बैकलाइन पर निर्माण हो गए तो कहीं कचरे और गंदगी ने उसे पाट दिया। कुल मिलाकर अधिकांश क्षेत्रों में समय के साथ बैकलाइन खत्म हो गई। कई साल पहले बनाए गए मकानों में बैकलाइन का बेहद ध्यान रखा जाता था। बैकलाइन वह लाइन है जो घरों के पिछले हिस्से में खाली क्षेत्र होता है जहां पर ड्रेनेज लाइन डाली जाती है। इस व्यवस्था के तहत ड्रेनेज लाइन घरों के पिछले हिस्से में होती है और पीने के पानी की लाइन घरों के सामने के हिस्से में होती है। इससे यदि कभी कोई लीकेज होता है तो दोनों लाइनों के बीच का अंतर बहुत अधिक होता है और कभी भी लीकेज के दौरान दोनों लाइनों का पानी एक दूसरे में नहीं मिल पाता है। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ें...
Bhopal News: एक ही चैंबर से पानी और सीवेज लाइन गुजरने के आरोप, महिला कांग्रेस का मंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन

निर्माण के प्राचीन तरीके छोड़कर हमने विकास के गलत पैमाने तय किए
इंदौर में पार्षद राजू भदौरिया ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि लगभग हर क्षेत्र में पीने के पानी में सीवरेज के पानी के मिलने की शिकायत आ रही है। शहर के पुराने इंजीनियर किसी भी क्षेत्र में बैकलाइन के बगैर कालोनी के निर्माण की अनुमति नहीं देते थे। जनसंख्या बढ़ने और जमीनें कम पड़ने के कारण धीरे धीरे नगर निगम में भी नियम बदलते गए। अब नई कालोनियों में सभी जगह बैकलाइन नहीं है। ड्रेनेज और नर्मदा लाइन एक साथ ही डल रही है। आप कितने भी प्रयास कर लें पर यदि दोनों लाइनें एक साथ पास पास डलेंगी तो यह समस्या आती रहेगी। हमें विकास के अपने नए पैमानों के बारे में फिर से सोचना पड़ेगा। 
विज्ञापन




घरों में सूर्य प्रकाश और हवा की आवाजाही बंद, बैकलाइन के साथ खत्म हुई सकारात्मकता
आर्किटेक्ट अतुल सेठ ने कहा कि घरों की बैकलाइन हवा, सूर्य की रोशनी का मुख्य स्थान होती थी। इनकी वजह से घरों में संक्रमण कम होता था और सकारात्मकता बनी रहती थी। समय के साथ बैकलाइन खत्म हो गई और घरों में सूर्य प्रकाश और हवा आनी तक बंद हो गई। घरों में हवा की आवाजाही का अब कोई रास्ता ही नहीं रहता। इसी तरह बैकलाइन में ड्रेनेज लाइन डाली जाती थी जो अब घरों के सामने नर्मदा लाइन के साथ ही डलने लगी है। इस वजह से जल संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। 
विज्ञापन


आज दो और लीकेज मिले
नगर निगम की टीम को जांच के दौरान एक बड़ा लीकेज मिला था। पुलिस थाने के शौचालय की ड्रेनेज लाइन से नर्मदा की लाइन में सीवरेज मिल रहा था। बताया जा रहा है कि यहां पर दोनों ही लाइनों के बीच का अंतर सिर्फ 3 फीट का ही था। यहां पर सबसे बड़ा लीकेज मिला है। इसके अलावा निगम की टीम को क्षेत्र में दो और लीकेज मिले हैं। 
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें