सेना के अफसर के साथ लूट, अड़ीबाजी और महिला मित्र से गैंगरेप के मामले में पीड़ित युवती बयान देने को राजी नहीं है। पुलिस को गैंगरेप की धारा हटाकर चालान पेश करना पड़ेगा। वरिष्ठ वकीलों का कहना है हालांकि इससे अपराध की गंभीरता कम नहीं होगी।
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पिछले दिनों सेना के दो युवा अफसर, महिला मित्रों के साथ जामगेट पहाड़ी पर गए थे। यहां इनके साथ लूट हुई और एक अफसर और उसकी महिला मित्र को बंधक बनाकर दस लाख रुपए की मांग की गई थी। आरोप है कि महिला मित्र से गैंगरेप हुआ था। सेना के अफसर की रिपोर्ट पर गैंगरेप की धारा भी लगाई थी। एसपी हितिका वासल सहित तमाम अफसरों के प्रयास के बाद भी पीड़ित महिला गैंगरेप को लेकर बयान देने को राजी नहीं है। पुलिस चालान पेश करेगी तो गैंगरेप की धारा हटा देगी। अन्य धाराओं में चालान पेश किया जाएगा।
धारा हटने से केस पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा
सीनियर एडवोकेट ललित काला का कहना है कि ऐसे मामलों में कोर्ट परिस्थितिजन्य साक्ष्य देखकर फैसला लेती है। पीड़ित युवती ने गैंगरेप की बात नहीं कही है, इसलिए पुलिस को वो धारा तो हटाना पड़ेगी, लेकिन इससे केस पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। सीनियर वकील संजय जैन का कहना है कि पुलिस ने गैंगरेप की धारा, युवती के साथी सेना के अफसर की रिपोर्ट पर लगाई थी। युवती ने रिपोर्ट नहीं लिखाई थी, इसलिए धारा हटने से केस पर फर्क नहीं पड़ेगा। युवती ने पहले गैंगरेप का बयान दिया होता और बाद में बदलती तो केस पर फर्क पड़ता। उसने ऐसा कुछ बयान नहीं दिया है। रही बात गैंगरेप की धारा लगाने की तो संज्ञेय अपराध में जरूरी नहीं है कि पीड़ित रिपोर्ट लिखाए। सूचनाकर्ता या रिपोर्ट लिखाने वाला कोई भी हो सकता है।
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कोर्ट ऑफ इनक्वॉयरी शुरू
सूत्रों का कहना है कि सेना के अफसरों की विभागीय जांच शुरू हो गई है। कोर्ट ऑफ इनक्वॉयरी हो रही है। बिना अनुमति के ये रात में गए थे। सेना की ये अंदरुनी जांच है। सीनियर अफसर बोर्ड गठित करता है। बोर्ड फैसला लेगा दोषी है कि नहीं।