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Indore Law College: सुप्रीम कोर्ट ने मप्र पुलिस से पूछा- लाइब्रेरी की किताब के लिए प्रिंसिपल को अरेस्ट करोगे?

Mon, 16 Jan 2023 04:35 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

Indore Law College: सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के न्यू लॉ कॉलेज में विवादित किताब के मामला मध्यप्रदेश पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछ लिया कि क्या आप सीरियस हैं, जो एक किताब के लिए प्रिंसिपल को गिरफ्तार करना चाहते हैं। 
 
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सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के न्यू लॉ कॉलेज में विवादित किताब के मामला मध्यप्रदेश पुलिस को फटकार लगाई है - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के न्यू लॉ कॉलेज की लाइब्रेरी में कथित हिंदू-विरोधी किताब के मामले में पुलिस को फटकारा है। पुलिस ने इस मामले में कॉलेज के उस समय के प्रिंसिपल डॉ. इनामुर रहमान के खिलाफ केस दर्ज किया है। सुप्रीम कोर्ट ने रहमान की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है, जिसे मध्यप्रदेश सरकार ने चुनौती देने की बात कही थी। 
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मामला इंदौर के न्यू लॉ कॉलेज का है। इस मामले को लेकर करीब एक महीने पहले खूब बवाल मचा था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद लेखक, प्रकाशक के साथ-साथ कॉलेज के प्रिंसिपल के खिलाफ भी गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर हुई थी। प्रदर्शन के बाद ही प्रिंसिपल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब पुलिस उनकी गिरफ्तारी की बात को लेकर अड़ी है। राज्य सरकार हाईकोर्ट से डॉ. रहमान को मिली अग्रिम जमानत को चुनौती देना चाहती थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने उसे फटकार लगाई। 

अमर लॉ पब्लिकेशन की किताब 'कलेक्टिव वॉयलेंस एंड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम' को लेकर बवाल मचा था। इसे कॉलेज में पढ़ाने वाली प्रोफेसर डॉ. फरहत खान ने लिखा है, जो इस किताब को लेकर 2021 में माफीनामा जारी कर चुकी हैं। उन्होंने उस किताब में जरूरी बदलाव भी कराए थे। इसके बाद भी पुरानी किताब लाइब्रेरी में होने की बात सामने आई थी। 
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छात्रों का आरोप है कि यह देशविरोधी प्रकृति की है। धार्मिक ताने-बाने और एकता को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि, डॉ. इनामुर रहमान ने कोर्ट को बताया कि यह किताब 2014 में प्रकाशित हुई थी। तब कॉलेज ने खरीदी थी। तब वह कॉलेज में प्रिंसिपल नहीं बल्कि प्रोफेसर थे। किताबों को खरीदने की कमेटी में भी नहीं थे। उनके खिलाफ केस राजनीतिक कारणों से लगा है। वह न तो किताब की मार्केटिंग में शामिल रहे हैं और न ही उसके प्रकाशन में।  

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी प्रिंसिपल को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. इनामुर रहमान की गिरफ्तारी पर 16 दिसंबर को रोक लगाई थी। इसके बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर को इस मामले में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी। जब रहमान के वकील एल्जो थॉमस ने यह बात कहते हुए मामला खत्म करने की दरख्वास्त की तो मध्यप्रदेश सरकार के वकील ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि हम हाईकोर्ट की ओर से दी गई अग्रिम जमानत का विरोध करेंगे। इस पर चीफ जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बैंच ने आश्चर्य जताया। 
 
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा-
चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने राज्य सरकार के वकील से कहा कि 'क्या आप सीरियस हैं? आपके पास और भी सीरियस काम होने चाहिए। वह कॉलेज प्रिंसिपल है। आप उन्हें क्यों गिरफ्तार करना चाहते हैं? उनके कॉलेज की लाइब्रेरी में विवादित किताब मिली है, जिसमें कुछ सांप्रदायिक बातें लिखी हैं। इस वजह से क्या उनकी गिरफ्तारी जरूरी है? किताब 2014 में खरीदी गई है और आप उन्हें गिरफ्तार करना चाहते हैं? क्या आप सीरियस हैं?'

छात्रों ने कराई थी शिकायत दर्ज 
राज्य सरकार के वकील ने कहा कि एलएलएम के छात्र ने शिकायतों की है कि डॉ. रहमान उस किताब से उन्हें पढ़ा रहे थे। इस किताब के दावे झूठे और बेबुनियाद हैं। इसे लेकर प्रिंसिपल के बयान भी विरोधाभासी हैं। एक तरफ वे कहते हैं कि उन्हें किताब की जानकारी नहीं है, जबकि वे उसमें से पढ़ा रहे थे। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप आदेश को चुनौती देना चाहते हैं, आप दीजिए। हम उसे भी सुन लेंगे।
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