इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में आखिरकार जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने 600 पेज की जांच रिपोर्ट को ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्ट करीब एक माह पहले कोर्ट में पेश की जा चुकी थी, लेकिन एक याचिकाकर्ता के वकील ने इसे सार्वजनिक नहीं करने का आग्रह किया था। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने रिपोर्ट को ऑनलाइन करने के निर्देश दे दिए। अब दो-तीन दिन में रिपोर्ट के सभी पेज स्कैन कर कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे।
खास बात यह है कि रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग खुद याचिकाकर्ताओं की ओर से की गई थी। जांच रिपोर्ट में भागीरथपुरा कांड के लिए अफसरों की जिम्मेदारी तय किए जाने के साथ ही ड्रेनेज लाइन में हुए कथित घोटाले का भी उल्लेख किया गया है।
600 पेज की रिपोर्ट में अफसरों पर जिम्मेदारी
भागीरथपुरा मामले को लेकर याचिका दायर होने के बाद जांच के लिए एक आयोग गठित किया गया था। आयोग ने बस्ती में दूषित पानी से हुई मौतों और पूरे घटनाक्रम की जांच की। मृतकों के परिजनों से दस्तावेज और प्रमाण लिए गए। इसके साथ ही संबंधित अफसरों से भागीरथपुरा बस्ती में कराए गए कामों और ड्रेनेज लाइन से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए।
जांच के बाद आयोग ने करीब 600 पेज की रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में पेश की। रिपोर्ट में हादसे के लिए संबंधित अफसरों को जिम्मेदार माना गया है। इसके अलावा ड्रेनेज लाइन से जुड़े कामों में गड़बड़ी और कथित घोटाले का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद पूरे मामले में जिम्मेदारी और लापरवाही को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
दिसंबर में भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी पीने के बाद लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला शुरू हुआ था। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा और मौतों का सिलसिला भी शुरू हो गया।
दूषित पानी के कारण 36 लोगों की मौत हुई, जबकि दो हजार से ज्यादा लोग बीमार हुए और 600 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कई मरीजों में लीवर और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आई थीं।
भागीरथपुरा का यह मामला देशभर में चर्चा में आया था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी भागीरथपुरा पहुंचे थे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की थी। राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई थी।अब जांच रिपोर्ट ऑनलाइन होने के बाद यह साफ होगा कि भागीरथपुरा में हुई मौतों के लिए किस स्तर पर लापरवाही हुई और ड्रेनेज लाइन के काम में क्या गड़बड़ियां सामने आई हैं।