सार
इंदौर में जिला पंचायत सभाकक्ष में केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा भूजल प्रबंधन, नियमन और भू-नीर पोर्टल पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें होटल, मॉल, उद्योगों और बड़े प्रोजेक्ट्स हेतु भूजल दोहन की अनुमति, एनओसी और संरक्षण नियमों की जानकारी दी गई।
जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार से संबंधित भूजल प्रबंधन एवं नियमन के विषय में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इंदौर में जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय भूजल बोर्ड, उत्तर मध्य क्षेत्र, भोपाल के तत्वावधान में जिला पंचायत सभाकक्ष, इंदौर में किया गया। इसमें विशेषज्ञों के द्वारा बताया गया कि भूजल को बहुत तेजी से दोहन हो रहा है और इसके संतुलित उपयोग व संरक्षण की जरूरत है। कार्यशाला में हॉस्पिटल, होटल, मॉल, उद्योग, पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर यूनिट, टैंकर संचालन, बोरिंग तथा बड़े आवासीय एवं व्यावसायिक प्रोजेक्ट सहित भूजल का उपयोग करने वाले संस्थानों के लिए लागू प्रावधानों और आवश्यक अनुमतियों की जानकारी को विशेष रूप से उपयोगी बताया गया। कार्यशाला का प्रमुख विषय “भूजल विकास एवं प्रबंधन का नियमन एवं भू-नीर पोर्टल जागरूकता” रहा।
इंदौर में भूजल का तेजी से हो रहा दोहन
इंदौर एवं आसपास के क्षेत्रों में भूजल पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भूजल के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग, संरक्षण तथा निर्धारित नियमों के पालन के प्रति जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भूजल एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, जिसका संरक्षण वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है। भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकने तथा उपलब्ध संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए नियमों की जानकारी और उनका प्रभावी पालन आवश्यक है।
ऑनलाइन प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया
कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय भूजल बोर्ड, उत्तर मध्य क्षेत्र, भोपाल के रीजनल डायरेक्टर अशोक कुमार बिसवाल के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) की वैज्ञानिक पैसनी पटेल द्वारा प्रतिभागियों को भूजल से संबंधित नियमों, प्रावधानों, प्रक्रियाओं, दंडात्मक प्रावधानों तथा ऑनलाइन पोर्टल के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यशाला में भूजल के नियमन, संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ ही भूजल दोहन से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) प्राप्त करने की प्रक्रिया, आवश्यक अनुमतियों तथा निर्धारित नियमों के पालन के संबंध में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। भू-नीर पोर्टल के माध्यम से भूजल से संबंधित आवेदन, अनुमति एवं अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाओं के संबंध में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
यह रहे मौजूद
कार्यशाला में नगर निगम, एफएसएसएआई, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, पर्यावरणविद्, क्रेडाई सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों तथा शहर हित में कार्य करने वाले अन्य हितधारकों ने सहभागिता की। कार्यशाला के माध्यम से विशेष रूप से उन संस्थानों एवं परियोजनाओं के लिए भूजल उपयोग से संबंधित नियमों की जानकारी साझा की गई, जहां भूजल का उपयोग बड़े स्तर पर किया जाता है। इस अवसर पर केंद्रीय भूजल बोर्ड की वैज्ञानिक अंजलि कुशवाहा एवं पार्थ सारथी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय तिवारी ने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।