इंदौर में 51 लाख पौधे लगाने की शुरुआत हो चुकी है। लगाए जा रहे पौधे जीवित रहें, इसके लिए ज्यादातर पौधे चार फीट से ज्यादा लंबे खरीदे गए हैं। इनके पनपने की संभावना ज्यादा रहती है। इंदौर में बेंगलुरु, चेन्नई व अन्य इलाकों से पौधे मांगे गए हैं।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि छोटे पौधे की जीवित रहने की संभावना कम रहती है, लेकिन बड़े पौधों की देखभाल ज्यादा नहीं करना होती है, इसलिए हमने बड़े पौधे मंगाए हैं। ताकि वे तीन से चार सालों में पेड़ का रूप ले सकें।
मास्टर प्लान का ग्रीन बेल्ट कम
इंदौर में मास्टर प्लान का ग्रीन बेल्ट 14 प्रतिशत है, लेकिन वास्तव में 8 प्रतिशत हरियाली भी नहीं बची। अब नगर निगम इंदौर का ग्रीन कवरेज एरिया 15 प्रतिशत तक करना चाहता है, हालांकि यह आसान नहीं है, क्योंकि ग्रीन बेल्ट के ज्यादातर हिस्से में अवैध बसाहट हो चुकी है।
60 करोड़ से ज्यादा पौधों पर खर्च
इंदौर में 51 लाख पेड़ लगाने के अभियान के लिए प्रदेश सरकार ने 20 करोड़ दिए हैं, जबकि 25 करोड़ के पौधे विभिन्न समाज, खेल, धार्मिक और अन्य संगठन, संस्थान और कंपनियां लगा रही हैं। अन्य विभाग भी दस करोड़ से ज्यादा के पौधे खरीदकर लगा रहे हैं।
अभिनेता सुनील शेट्टी ने लगाए पौधे
इंदौर में सोमवार को अभिनेता सुनील शेट्टी आए। वे रेवती रेंज टेकरी पर गए और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ पौधे लगाए। मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी अभियान में शामिल होंगे। वे शाम को निगम के सभागृह में पार्षदों से भी मुलाकात करेंगे।
स्कूल, अस्पताल परिसर में लगाए पौधे
सोमवार को शहर के विभिन्न उद्यानों, स्कूल परिसर, अस्पताल परिसर में पौधे लगाए गए। शासकीय बीमा हॉस्पिटल कैंपस में पार्षद नंदू पहाड़िया ने कर्मचारियों के साथ पौधे लगाए। बाल विनय मंदिर स्कूल, स्वामी विवेकानंद विद्यालय, मालवा मिल कर्मचारी राज्य बीमा निगम कैंपस में भी पौधारोपण हुआ।
टाई सदस्यों ने लगाए पौधे, सांसद बोले- इनका ध्यान भी रखें
ट्रेवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मध्यप्रदेश चेप्टर का वार्षिक पौधारोपण कार्यक्रम सोमवार को हुआ। इसके मुख्य अतिथि सांसद शंकर लालवानी थे। इस अवसर पर सांसद ने सदस्यों से कहा कि आप लोग यह पौधे लगा रहे हैं, लेकिन इनका ध्यान भी रखें। अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन ने बताया कि हम हमारा लगातार आठ सालों से पौधे लगा रहे हैं। इससे पहले हम एयरपोर्ट कॉलोनी परिसर, रिंग रोड़, सुपर कॉरिडोर इलाके में पौधे रोपे थे। अच्छी बात यह है कि हमारे द्वारा लगाए ज्यादातर पौधे जीवित रहे हैं।