ग्राहक पंचायत द्वारा आयोजित कार्यक्रम।
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अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य अतिथि वीणा संत ने उद्बोधन में स्वस्थ रहने के लिए बचपन से ही योग के अभ्यास का महत्व बताया। शरीर में किसी बीमारी के प्रवेश को रोकने के लिए शक्कर और नमक दोनों ही सफेद चीज का कम उपयोग करें। कफ, पित्त और वात ही प्रत्येक बीमारी का कारण बनते हैं, जिन्हें विभिन्न प्रकार के योगासन नियंत्रित कर सकते हैं। हमारे जीवन में प्रत्येक क्षण में हम आसन करते हैं। जब हम सामान्य रूप से बैठते हैं वह भी एक आसान है। योगासन शरीर और मन को जोड़ता है। गणित में एक और एक दो होते हैं, जबकि योग में एक और एक शून्य होते हैं, क्योंकि योग हमें निर्विकार कर देता है। पूर्ण रूप से सक्रिय और स्मार्ट होने पर भी मातृ शक्ति स्वयं के प्रति लापरवाह होकर बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। सभी आन्तरिक अंगों को स्वस्थ रखने के लिए सुव्यवस्थित रूप से योग करें। जिस प्रकार कम्प्यूटर में वायरस लगने से पूरा सिस्टम ध्वस्त हो जाता है, उसको नियंत्रित करने के लिए एंटीवायरस आवश्यक है। ठीक उसी प्रकार, योग से रक्त परिसंचरण तंत्र, पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, मांसपेशियों और अवचेतन मन पर नियंत्रण करने के लिए योगासन आवश्यक है।
भूख, नींद, उत्सर्जन कभी नहीं रोकें
प्रकृति द्वारा दिए गए संकेत- भूख, नींद, उत्सर्जन में कोई अवरोध नहीं होना चाहिए। हम किसी भी प्रकार से इन्हें रोक नहीं सकते हैं और यदि रोकेंगे तो रोगों से घिर जाएंगे। प्रतिदिन सूक्ष्म अवलोकन की प्रैक्टिस करें, तो हमारे अंदर की शक्ति में अवश्य ही वृद्धि होगी। योग वर्तमान में जीना सिखाता है। सकारात्मक सोच रखकर स्वस्थ रहना आसान है। प्रतिदिन शवासन नियमित रूप से करें। अंकुरित अनाज अवश्य लें। इच्छाएं उतनी बलवती नहीं होती हैं, परंतु प्रलोभन के कारण हम अपनी अनावश्यक इच्छाओं को छोड़ नहीं पाते हैं। अन्दर के शोर को कम करें और अन्तरात्मा की आवाज सुनें। मन और चैतन्य शक्ति दोनों एक हैं और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। दैनिक जीवन में कार्य करते हुए भी योग संभव है। पंच महाभूत द्वारा हम स्वयं को स्वस्थ रख सकते हैं।
मोटे अनाज भी दो प्रकृति के होते हैं, ठंडे और गर्म
विशिष्ट अतिथि प्रीति चौहान पंजाबी ने कहा कि मोटा अनाज जिसे मिलेट्स के नाम से पहचाना जाता है, नियमित रूप से उपयोग करने पर अनेक बीमारियों को नियंत्रित कर सकता है। हरित क्रांति के लिए उपयोग किए जाने वाले अत्यधिक कीटनाशकों के कारण आमजन कैंसर का शिकार हो रहे हैं। यही कारण है कि हरियाणा में अत्यधिक संख्या में कैंसर रोगी हैं। यदि मोटा अनाज उपयोग किया जाए तो दांतों पर जोर अवश्य लगता है, परन्तु स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है। एक ही प्रकार के मोटे अनाज का लगातार प्रयोग नहीं करना चाहिए। पहले दो दिन तक बाजरा, फिर दो दिन तक रागी, फिर दो दिन तक ज्वार, उसके बाद दो दिन तक कोडो का उपयोग करें। छत्तीसगढ़ की एक विशेष उपज कोडो भी मोटे अनाज का हिस्सा है। प्रत्येक मोटे अनाज की अपनी अलग- अलग प्रकृति होती है। कुछ मोटे अनाज ठंडी प्रकृति के होते हैं, जबकि कुछ गर्म होते हैं, इसलिए इन्हें मिलाकर एक साथ उपयोग नहीं करना चाहिए। रात को भिगोकर रखें और सुबह उसका उपयोग करें। ठंड के मौसम में रात में लगभग 12 घंटे भिगोकर रखने के बाद इसके व्यंजन बना सकते हैं, जबकि गर्मी के मौसम में 6 से 7 घंटे भिगोना ही पर्याप्त है। मोटे अनाज के व्यंजनों को प्रेशर कुकर में नहीं पकाना चाहिए, इसे मिट्टी की हांडी में पकाना स्वास्थ्यवर्धक होता है। यदि इस मोटे अनाज को पीसकर उसमें केला मिला दें तो वह एक अच्छा मीठा व्यंजन होगा, उसे बच्चे भी रुचि लेकर खा सकते हैं।
इससे पहले अरुणा जोशी, भारती धर्माधिकारी द्वारा प्रस्तुत ग्राहक गीत के साथ कार्यशाला की शुरुआत हुई। मीनाक्षी निमगांवकर ने अतिथि परिचय प्रस्तुत किया। डॉ. शशिकला चौधरी ने ग्राहक पंचायत की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों से अवगत कराया। अंत में ग्राहक पंचायत के मालवा प्रान्त अध्यक्ष दीपलक्ष्मी धामणकर ने श्रोताओं की ओर से जिज्ञासाएं प्रस्तुत की। लीना तिवारी ने आभार व्यक्त किया। लता जाधव और विनया आठले द्वारा प्रस्तुत वन्दे मातरम गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सीमा आठले ने मंच संचालन किया।