स्मार्ट सिटी काॅफ्रेंस के लिए इंदौर आए स्मार्ट सिटी मिशन के डायरेक्टर कृणाल कुमार ने कहा कि आठ सालों में देश के 100 शहरों में 75 हजार करोड़ रुपये के काम हुए है। छह हजार से ज्यादा प्रोजेक्ट पूर्ण हो चुके है और इन प्रोजेक्टों के कारण उन शहरों के लोगों का जीवन स्तर सुधरा है। कुछ शहरों में पीपीपी माॅडल पर भी काम हुए है। कुमार ने कहा कि पहले शहरों में मूलभूत सुविधाएं पर ही फोकस रहता था, लेकिन स्मार्ट सिटी मिशन में नवाचारों को भी महत्व दिया।
इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम, वायु प्रदूषण नियंत्रण, नदियों के पुर्नजीवन सहित कई प्रोजेक्टों पर अनेक शहरों में उल्लेखनीय काम हुए है। इन कामों से लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है। शहरों के लोक परिवहन सिस्टम को और मजबूत करने की कोशिश की गई।
स्मार्ट शहर का कोई पैमाना नहीं
मिशन डायरेक्टर कृणाल कुमार ने कहा कि स्मार्ट सिटी का कोई पैमाना नहीं है। हर शहर में लगातार नए कामों की गुंजाईश रहती है। हर शहर की अलग पहचान होती है और स्मार्ट सिटी के तहत हुए कामों ने उस पहचान को और निखारा है। स्मार्ट सिटी कंपनी में जनप्रतिनिधियों के शामिल नहीं करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी की गाइडलाइन में सारी बातें तय है।
नगरीय निकाय और शासन स्मार्ट सिटी कंपनी के शेयर होल्डर है। यह दोनो संस्थाएं तय करती है कि गवर्निंग बाॅडी में कौन रहेगा। स्मार्ट सिटी मिशन में अन्य नए शहरों को जोड़े जाने के सवाल पर कुमार बोले कि यदि एक साथ देश के छह हजार शहरों को लेते तो कही भी ठीक से काम नहीं होते। विश्व के कई देश शहरों के लिए नेशनल प्रोग्राम को मूर्त रुप नहीं दे पाए। देश के 100 शहरों को पहले हमने चुना है। अब दूसरे शहरों को भी स्मार्ट बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
शहर के सफाई माॅडल को देखेंगे मेहमान
स्मार्ट सिटी काॅफ्रेंस में 2 हजार से ज्यादा मेहमान आएंगे। इसमें एक हजार से ज्यादा वीआईपी को केंद्र सरकार की तरफ से आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के नगर परिषद के अफसर व जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। मेहमानों को शहर की सफाई व्यवस्था का अवलोकन कराया जाएगा। ट्रेंचिंग ग्राउंड, ट्रीटमेंट प्लांट की ट्रीप भी कराई जाएगी।