2100 पेज की रिपोर्ट
2100 पेज की इस रिपोर्ट में भोजशाला के सर्वे के दौरान खींची गई 500 से ज्यादा तस्वीरों को बतौर प्रमाण शामिल किया गया है। रिपोर्ट में यह तथ्य निकल कर आया है कि भोजशाला का निर्माण 12 वीं शताब्दी में हुआ जबकि मालवा में कमाल मौला, का आगमन 1265 में हुआ। मुस्लिम पक्ष भोजशाला को कमाल मौला के नाम पर ही मस्जिद बताते हुए इस पर दावा कर रहा है। वहीं, हिंदूपक्ष इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानते हुए इस पर अपना हक जता रहा है।
अभिलेख 12 से 16वीं सदी के
रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि भोजशाला मंदिर सह कमाल मौला मस्जिद परिसर में संस्कृत, प्राकृत तथा स्थानीय बोलियों में नागरी लिपि में लिखे गए अभिलेख 12वीं से 16वीं शताब्दी ईस्वी के बीच के माने जाते हैं। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण अभिलेख जैसे पारिजातमंजरी-नाटिका, अवनिकूर्मशतम तथा नागबन्ध अभिलेख का परीक्षण किया गया है। इनका विस्तृत विवरण भारतीय पुरालेख कॉर्पस इंस्क्रिप्शनम इंडिकारम में किया गया है।
एक विशाल अभिलेख में पारिजातमंजरी-नाटिका व विजयश्री अंकित है। इसमें उल्लेख है कि यह कृति मदन द्वारा रचित है, जो धार के राजा अर्जुनवर्मन के गुरु (आचार्य) थे। अर्जुनवर्मन, सुभटवर्मन के पुत्र थे और परमार वंश से संबंधित थे। इनको सम्राट भोजदेव का वंशज माना जाता है। प्रस्तावना के अनुसार, इस नाटक का प्रथम मंचन देवी सरस्वती (शारदा देवी) के मंदिर यानी भोजशाला में हुआ था।
धार भोजशाला में हर शुक्रवार नमाज भी पढ़ी जाती है।
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एक अन्य बड़े अभिलेख में प्राकृत भाषा में दो कविताएं अंकित हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 श्लोक हैं। पहली कविता के उपसंहार में उसका नाम अवनिकूर्मशतम बताया गया है और उसकी रचना महाराजाधिराज परमेश्वर भोजदेव को समर्पित मानी गई है। दूसरी कविता के अंत में कोई उपसंहार नहीं है, परंतु यह भी कहा गया है कि उसका रचनाकार भोज ही थे।
राजा भोज द्वारा स्थापित केंद्र
पश्चिमी स्तंभ-श्रेणी में स्थित दो अलग-अलग स्तंभों के अभिलेख व्याकरण और शिक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये अभिलेख उस विद्या-केंद्र की परंपरा की ओर संकेत करते हैं, जिसे परंपरागत रूप से राजा भोज द्वारा स्थापित माना जाता है। इनमें से एक अभिलेख के प्रारंभिक श्लोक में परमार वंश के उदयादित्य के पुत्र राजा नरवर्मन (शासनकाल 1094–1133 ई.) का उल्लेख मिलता है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट में शामिल तथ्य यह इशारा कर रहे है कि भोजशाला मस्जिद से कई वर्षों पहले से स्थापित है।