इंदौर और आसपास के जिलों से एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के कार्यकर्ता डीएवीवी (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय) की अव्यवस्थाओं को लेकर प्रदर्शन करने आरएनटी परिसर पर स्थित कैंपस पहुंचे। यहां पर उन्होंने कुलपति रेणु जैन और विवि के कामकाज के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने अपनी 25 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे। विवि के घेराव के दौरान आनएनटी मार्ग की एक तरफ की रोड पूरी तरह से बंद कर दी गई और एक तरफ से ही आवाजाही होती रही।
रीजनल सेंटर्स के नाम पर लाखों रुपए का भ्रष्टाचार
एबीवीपी की मांग थी कि परीक्षा परिणामों में लगातार अव्यवस्थाएं हो रही हैं लेकिन उनमें सुधार नहीं किया जा रहा है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। इसके साथ कालेजों में बढ़ते नशे पर भी युवाओं ने अपनी बात रखी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री डॉ.वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि रीजनल सेंटर की भी हालत खराब है। यहां आते हैं तो दो-दो दिन रूकना पड़ता है, लेकिन फिर भी समस्याओं का निराकरण नहीं होता है। यह भी आरोप लगाया गया कि बंद हो चुके रीजनल सेंटर्स के नाम पर लाखों रुपए जारी किए गए। एबीवीपी ने इसके प्रमाण भी अधिकारियों को सौंपे।
बड़ा आंदोलन करेगी एबीवीपी
सोलंकी ने कहा कि यदि समय रहते हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे और कुलपति के इस्तीफे की मांग करेंगे। आसपास के जिलों से आए कार्यकर्ताओं ने कहा कि डीएवीवी से संबंधित कालेज मनमानी करते हैं और शिकायत करने पर डीएवीवी कोई एक्शन नहीं लेती। इसलिए इंदौर के आसपास के जिलों की शिक्षा व्यवस्था भी बिगड़ रही है।
अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने बताया कि अभाविप शिक्षा जगत में चल रही समस्याओं एवं उनके समाधान को लेकर सतत कार्य कर रही है, समय समय पर विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों की समस्याओं से भी अवगत करवाते आई है। विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालयीन समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए निम्न प्रकार कि मांगे रखी :-
1. छात्रों को आ रही समास्याओं के समाधान के लिए किए जाने वाले आंदोलन, प्रदर्शन आदि पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया जो कि लोकतंत्र की हत्या करने का प्रयास है।
2. वर्ष 2008 से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। जिसके परिणाम स्वरूप पर्याप्त प्राध्यापकों की कमी से शिक्षा प्रभावित हो रही है।
3. विद्यार्थियों के विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए नोडल सेंटर प्रारंभ करना चाहिए ताकि दूर दराज के विद्यार्थियों को अनायास विश्वविद्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
4. विभिन्न विभागों में विभागाध्यक्ष के पदों पर वर्षों से एक ही प्राध्यापक जमे हुए हैं जिससे कि वो अपनी मनमानी चला रहे हैं। रोस्टर सिस्टम को प्रभावी बनाकर तत्काल प्रभाव से समस्त विभागाध्यक्ष, प्रशासनिक पदों पर रोटेशन प्रणाली को लागू किया जाए।
5. प्रवेश, परीक्षा और परिणाम को लेकर विश्वविद्यालय के वार्षिक अकादमिक कैलेंडर का पालन नहीं होने से विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहे हैं।
6. मूल्यांकन एवं पुनर्मूल्यांकन में त्रुटि, शिक्षकों की अनदेखी, दोषपूर्ण मूल्यांकन कर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
7. विश्वविद्यालय में नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की विसंगतियों को दूर किया जाए एवं समस्त शिक्षकों को नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मापदंडों के अनुरूप तत्काल प्रभाव से प्रशिक्षित कर गुणवत्तापूर्ण उत्तम शिक्षा की व्यवस्था को मजबूती प्रदान की जाए।
8. विश्वविद्यालय परीक्षा प्रश्न पत्र लीक होना दुर्भाग्यपूर्ण है। पेपर लीक की ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु दोषियों पर कठोर कार्रवाई कर परीक्षाओं का संचालन सुचारू रूप से हो पाए इसे तय करें।
9. निजी महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों में विश्वविद्यालय कोड-28 के नियमों की अवहेलना हो रही है। इस पर तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाया जाए एवं कोड 28 का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए।
10. परीक्षा कॉपी खरीदी में हुई धांधली पर उचित कार्रवाई की जाए साथ ही कॉपियों के मुद्रण की व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रेस द्वारा किए जाने की व्यवस्था की जाए।
11. विश्वविद्यालय परिसर में नशे का बढ़ता कुप्रभाव चिंता का विषय है। सुरक्षा व्यवस्था में लगाई गई एजेंसी दुष्प्रभावी है। एजेंसी का ठेका रद्द करें।
12. विश्वविद्यालय छात्रावासों में पानी की व्यवस्था, साफ-सफाई, बिजली एवं अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं का समुचित व्यवस्था की जाय। साथ ही साथ छात्रावासों में पदस्थ वार्डन के लिए भी रोटेशन की व्यवस्था हो।
13. विश्वविद्यालय संबंधित विद्यार्थियों को विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु वीसी हेल्पलाइन जारी किया जाए।
14. महाविद्यालयों में प्रवेश के समय विद्यार्थियों से छात्र कल्याण के नाम पर ली जाने वाली राशि विद्यार्थियों के विकास व कल्याण हेतु समुचित ढंग से उपयोग नहीं की जाती है। अतः छात्र कल्याण निधि का उपयोग विद्यार्थी के व्यक्तित्व विकास एवं विभिन्न कार्यशालाओं के योजान आदि में किया जाए।
15. शोध की गुणवत्ता एवं शोधार्थियों के लिए शोध संबंधित सुविधाओं को बढ़ाया जाए तथा पीएचडी की प्रवेश परीक्षा नियमित रूप से की जाए।
16. विश्वविद्यालय से संबंधित महाविद्यालय की मान्यता राज्य शासन द्वारा दिए गए मापदंड के आधार पर मान्यता दी जाए। मापदंड का पालन न करते हुए गलत मान्यता देने पर विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी पर उचित कार्रवाही की जाए।
17. वर्तमान में विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक अस्थाई रूप से पदस्थ होने के कारण परीक्षा परीणाम में देरी हो रही है। अत: तत्काल प्रभाव से परीक्षा नियंत्रक की स्थाई नियुक्ति की जाए।
18. पारंपरिक और व्यावसायिक कोर्स के प्रश्न पत्र समान, उत्तरपुस्तिका का मानदेय समान होने पर भी पारंपरिक कोर्स की परीक्षा शुल्क कम और व्यवसायिक कोर्स की परीक्षा शुल्क अधिक लिया जा रहा है। अत: पारंपरिक एवं व्यवसायिक कोर्स की परीक्षा शुल्क समान की जाए।
19. विश्वविद्यालय के सफाई कर्मियों के वेतन में घोटाला किया जा रहा है, न्यूनतम 8700 रुपये से 12000 रुपए तक मासिक वेतन भुगतान होना है, परंतु 5500 से 6000 रुपये सफाई कर्मियों के हाथ मे आता है, सफाई का ठेका आउट सोर्स कंपनी को दिया गया है जिसे 3 सरकारी विभाग ब्लैक लिस्ट कर चुके हैं। पिछले 3 वर्षों से विश्वविद्यालय में सफाई के लिए टेंडर नहीं निकालना साफ साफ विश्वविधालय की मिलीभगत है। अत: अभाविप यह मांग करती है कि वर्तमान सफाई एजेंसी को तत्काल हटाकर नए टेंडर जारी किए जाएं और सफाई कर्मियों के वेतन में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए।
20. विधि विद्यार्थियों का समय पर परीक्षा व परिणाम नहीं आने से ऐसे हजारों विद्यार्थी प्रवेश लेने से वंचित रह जाते हैं। अत: अभाविप यह मांग करती है कि लॉ डीन की तत्काल नियुक्ति की जाए साथ ही प्रश्न पत्र सेट करने वाली कमेटी का नवीनीकरण किया जाए।