प्रवासी भारतीय सम्मलेन में इंदौर आई पाई ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि चार साल पहले वह हिंदू धर्म के अनुयायियों के संपर्क में आईं। उस दौरान उन्हें यह समझ में आया कि हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति कितनी वैज्ञानिक रूप से सशक्त है। यह न सिर्फ मानवीय मूल्यों पर आधारित है, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए भी मनुष्य को तैयार करती है।
इन सभी बातों से प्रभावित होकर उन्होंने हिंदू धर्म को अपना लिया और सीता रानी बन गईं। उन्होंने बताया कि जल्द ही उनका नाम पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों पर भी बदल दिया जाएगा। वह पिछले कुछ सालों से सिंगापुर में रह रही हैं और मूलत चीन की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि वह जब भी मौका मिलता है तो भारत आती हैं और भारतीय मंदिरों विरासताओं और लोक संस्कृति से जुड़ती हैं।
दूसरों को भी कर रहीं प्रेरित...
ची चिआव पाई ने बताया कि वह हिंदू धर्म अपनाने के लिए अब सिंगापुर में अन्य लोगों को भी प्रेरित करती हैं। चार साल के दौरान उन्होंने यह गहराई से समझ लिया कि हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति इंसान के जीवन को कितना बेहतर बनाती है। इसी बात को समझने के बाद अब वे हर जगह इसका प्रचार कर रही हैं और लोगों से हिंदू धर्म अपनाने के लिए कहती हैं।